हालांकि, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि किसी दवा को ग्रुप-1 में रखना इस बात का संकेत है कि उसके इस्तेमाल और कैंसर के बीच पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं। इसका यह अर्थ नहीं है कि हर व्यक्ति में दवा लेने से कैंसर होना तय है। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना इन दवाओं का सेवन बंद नहीं करना चाहिए।
हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड से त्वचा कैंसर का खतरा
हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली सामान्य दवा है। IARC के अनुसार, इसके लंबे समय तक इस्तेमाल और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा तथा होंठ के कैंसर के बीच संबंध के पर्याप्त प्रमाण मिले हैं। अमेरिका और डेनमार्क में हुए अध्ययनों में लंबे समय तक इस दवा का इस्तेमाल करने वाले लोगों में त्वचा कैंसर की दर अधिक पाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक कारण फोटो-टॉक्सिसिटी हो सकता है। यानी दवा त्वचा को सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती है, जिससे लंबे समय तक धूप में रहने पर त्वचा की कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
वोरिकोनाजोल से भी जुड़ा त्वचा कैंसर
वोरिकोनाजोल एक एंटी-फंगल दवा है, जिसका इस्तेमाल गंभीर फंगल संक्रमण से जूझ रहे मरीजों में किया जाता है। खासतौर पर कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीजों में इसकी जरूरत पड़ सकती है। अध्ययनों में लंबे समय तक वोरिकोनाजोल लेने वाले कुछ ट्रांसप्लांट मरीजों में स्क्वैमस सेल त्वचा कैंसर का संबंध सामने आया है। इसके पीछे भी फोटो-टॉक्सिक प्रभाव को एक संभावित कारण माना गया है।
टैक्रोलिमस से कमजोर पड़ती है प्रतिरक्षा प्रणाली
टैक्रोलिमस मुख्य रूप से अंग प्रत्यारोपण के बाद दी जाती है। इसका उद्देश्य शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करना होता है, ताकि वह नए प्रत्यारोपित अंग को अस्वीकार न करे। IARC के मुताबिक, टैक्रोलिमस का संबंध नॉन-हॉजकिन लिंफोमा और पोस्ट-ट्रांसप्लांट लिम्फोप्रोलिफेरेटिव डिसऑर्डर से पाया गया है। इसका संभावित कारण प्रतिरक्षा प्रणाली का लंबे समय तक दबा रहना है। हालांकि, कुछ अन्य प्रकार के कैंसर के संबंध में उपलब्ध प्रमाण सीमित हैं।
भारत में भी इन दवाओं का व्यापक इस्तेमाल
भारत में इन तीनों दवाओं का अलग-अलग चिकित्सा परिस्थितियों में इस्तेमाल होता है। हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड ब्लड प्रेशर के इलाज में, वोरिकोनाजोल गंभीर फंगल संक्रमण में और टैक्रोलिमस अंग प्रत्यारोपण के बाद प्रमुख रूप से इस्तेमाल की जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दवाओं की नई वर्गीकरण जानकारी डॉक्टरों और मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है। खासकर लंबे समय तक दवा लेने वाले मरीजों को अपने चिकित्सक से नियमित सलाह लेते रहना चाहिए।
महत्वपूर्ण: मरीजों को इन दवाओं को अपने स्तर पर बंद नहीं करना चाहिए। दवा जारी रखने, बदलने या उसकी खुराक में बदलाव का फैसला केवल संबंधित डॉक्टर की सलाह से किया जाना चाहिए।