द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। एक अमेरिकी विमान सुरक्षा समूह ने दावा किया है कि भारत में पिछले साल दुर्घटनाग्रस्त हुआ यह विमान हादसे से पहले लंबे समय से कई तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहा था। इनमें इन-फ्लाइट फायर जैसी गंभीर घटनाएं भी शामिल बताई गई हैं। यह खुलासा बीबीसी की एक रिपोर्ट में सामने आया है।
गौरतलब है कि टाटा ग्रुप की कंपनी एयर इंडिया द्वारा संचालित यह बोइंग 787 विमान 12 जून 2024 को अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस भीषण हादसे में कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। मामले की आधिकारिक जांच अभी भी जारी है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ‘फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी’ (FAS) नामक अमेरिकी संगठन ने अमेरिकी सीनेट की स्थायी जांच उपसमिति को एक प्रेजेंटेशन सौंपा है। इसमें संगठन ने दावा किया है कि उन्हें मिले आंतरिक दस्तावेजों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाले गए हैं। संगठन का आरोप है कि यह विमान एयर इंडिया के बेड़े में शामिल होने के पहले दिन से ही सिस्टम फेल्योर से जूझ रहा था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विमान में बार-बार इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर से जुड़ी दिक्कतें सामने आईं। सर्किट ब्रेकर ट्रिप होना, वायरिंग खराब होना, शॉर्ट सर्किट की घटनाएं, बिजली आपूर्ति का बाधित होना और पावर सिस्टम के पुर्जों का जरूरत से ज्यादा गर्म होना जैसी समस्याएं लगातार दर्ज की गई थीं।
एफएएस ने यह भी दावा किया है कि जनवरी 2022 में फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान विमान के P100 पावर डिस्ट्रीब्यूशन पैनल में आग लग गई थी। बाद में जांच में सामने आया कि आग से नुकसान इतना गंभीर था कि पूरे पैनल को बदलना पड़ा। यह पैनल इंजन से उत्पन्न हाई-वोल्टेज बिजली को पूरे विमान में सप्लाई करने का अहम हिस्सा होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बोइंग 787 विमान पुराने विमानों की तुलना में बिजली प्रणालियों पर कहीं अधिक निर्भर करता है। इससे पहले भी 2013 में बैटरी में आग लगने की घटनाओं के चलते इस मॉडल को वैश्विक स्तर पर अस्थायी रूप से ग्राउंड किया जा चुका है।
अहमदाबाद हादसे की जांच भारत का विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) कर रहा है, जिसमें अमेरिकी अधिकारी भी शामिल हैं। हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में पायलट की संभावित गलती की ओर इशारा किया गया था, लेकिन पीड़ितों के वकीलों और विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी कारणों को नजरअंदाज करना जल्दबाजी होगी।
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