अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य नाकेबंदी लागू कर दी है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला यह अहम समुद्री मार्ग अब अमेरिकी सेना के नियंत्रण में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नाकेबंदी को लागू करने के लिए अमेरिका ने कम से कम 15 युद्धपोत तैनात किए हैं, जिन पर दर्जनों फाइटर जेट मौजूद हैं। इसके अलावा 10,000 से ज्यादा सैनिकों को भी इस मिशन में लगाया गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकेबंदी के पहले 24 घंटों में ही 6 मर्चेंट नेवी जहाजों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें ओमान की खाड़ी की ओर लौटना पड़ा। इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है।
भारतीय जहाजों को मिला था ईरान का सहयोग
मैरीटाइम ट्रैकिंग एजेंसियों के अनुसार, 13 अप्रैल 2026 को नाकेबंदी लागू होने से पहले तक 10 भारतीय जहाज ईरान के सहयोग से सुरक्षित होर्मुज पार कर चुके थे। खास बात यह है कि ईरान ने इन जहाजों से कोई टोल भी नहीं लिया, जबकि अन्य देशों के जहाजों पर शुल्क लगाया जा रहा था। यह भारत-ईरान संबंधों की मजबूती को दर्शाता है।
लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण करीब 15 भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में ही फंसे हुए हैं और आगे बढ़ने में असमर्थ हैं। इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर खतरा मंडराने लगा है।
ट्रंप-मोदी के बीच अहम बातचीत
इस संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। करीब 40 मिनट चली इस चर्चा में पश्चिम एशिया के हालात, ईरान के साथ विफल वार्ता और होर्मुज में नाकेबंदी जैसे मुद्दों पर बात हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला और सुरक्षित रहना भारत के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि इस समुद्री मार्ग से ही भारत की तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा आता है।
भारत के हितों पर सीधा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर पड़ता है। मौजूदा हालात में भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रहती है, तो भारत को वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और कूटनीतिक प्रयासों को तेज करना होगा। फिलहाल, भारत की नजर इस बात पर टिकी है कि क्षेत्र में तनाव कम हो और होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा सामान्य रूप से खुल सके।