‘नागरिकों के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार पर किए गए अंतिम सर्वे का मूल्यांकन’ शीर्षक से जारी इस सर्वे में 83.61 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें ईवीएम पर भरोसा है। वहीं 69.39 प्रतिशत लोगों ने माना कि ईवीएम सही और भरोसेमंद नतीजे देती है, जबकि 14.22 प्रतिशत ने इस बात से पूरी तरह सहमति जताई। यह सर्वे राज्य के 102 विधानसभा क्षेत्रों में 5,100 लोगों के बीच किया गया, जिसमें बेंगलुरु, बेलगावी, कलबुर्गी और मैसूर प्रशासनिक क्षेत्रों को शामिल किया गया।
आंकड़ों के अनुसार, ईवीएम पर सबसे अधिक भरोसा कलबुर्गी क्षेत्र में देखने को मिला, जहां 83.24 प्रतिशत लोगों ने सहमति और 11.24 प्रतिशत ने पूर्ण सहमति जताई। मैसूर में 70.67 प्रतिशत ने सहमति और 17.92 प्रतिशत ने पूरी सहमति व्यक्त की। बेलगावी में 63.90 प्रतिशत ने सहमति और 21.43 प्रतिशत ने पूर्ण सहमति जताई। वहीं बेंगलुरु में पूर्ण सहमति का प्रतिशत सबसे कम 9.28 रहा, हालांकि 63.67 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ईवीएम को भरोसेमंद माना। बेंगलुरु में तटस्थ मतों की संख्या सबसे अधिक 15.67 प्रतिशत रही।
सर्वे के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी वर्षों से देशभर में यह कहते रहे हैं कि लोकतंत्र खतरे में है और ईवीएम अविश्वसनीय हैं, लेकिन कर्नाटक का यह सर्वे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है। भाजपा का कहना है कि यह सर्वे साबित करता है कि जनता चुनाव प्रक्रिया, ईवीएम और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा करती है और यह कांग्रेस के दावों पर करारा जवाब है।
भाजपा ने इस मुद्दे पर कर्नाटक सरकार की भी आलोचना की और कहा कि जनता के स्पष्ट भरोसे के बावजूद सिद्धारमैया सरकार स्थानीय निकाय चुनावों में मतपत्र प्रणाली लागू कर राज्य को पीछे ले जा रही है। पार्टी का आरोप है कि मतपत्रों का इस्तेमाल हेरफेर, देरी और दुरुपयोग के लिए जाना जाता है, जबकि ईवीएम पर जनता का विश्वास पहले से ही साफ नजर आ रहा है।