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चीन-अमेरिका की प्रतिस्पर्धा के बीच बांग्लादेश की साइबर सुरक्षा पर बढ़ी चिंता, विशेषज्ञों ने जताए खतरे

Published on: June 2, 2026
Amidst China-America competition

द  देवरिया न्यूज़,ढाका : वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और साइबर युद्ध की आशंकाओं के बीच बांग्लादेश की डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण बांग्लादेश बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन सकता है।

साइबर सुरक्षा पर बढ़ा वैश्विक फोकस

ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी आउटलुक 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 91 प्रतिशत बड़ी संस्थाओं ने भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए अपनी साइबर सुरक्षा रणनीतियों में बदलाव किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और खुफिया नेटवर्क पर साइबर हमले अब वैश्विक शक्ति संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे माहौल में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों को अपनी साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।

बांग्लादेश का बढ़ता साइबर सुरक्षा बाजार

मार्केट रिसर्च संस्था मॉर्डोर इंटेलिजेंस के अनुसार, बांग्लादेश का साइबर सुरक्षा बाजार 2026 में लगभग 250.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर का हो सकता है, जो 2031 तक बढ़कर 503.28 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और दूरसंचार क्षेत्र के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

चीन के निवेश और तकनीकी सहयोग पर चर्चा

हाल के वर्षों में चीन ने बांग्लादेश में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और तकनीकी परियोजनाओं में निवेश बढ़ाया है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच विभिन्न औद्योगिक और तकनीकी सहयोग परियोजनाओं पर भी बातचीत जारी है।

विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी देश में विदेशी तकनीकी निवेश बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण के मुद्दे भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का प्रभाव

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक शक्तियों के बीच तकनीकी और डिजिटल प्रतिस्पर्धा का असर छोटे और विकासशील देशों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, किसी विशेष देश द्वारा बांग्लादेश को साइबर जासूसी का केंद्र बनाने या किसी देश की प्रत्यक्ष संलिप्तता संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इसलिए ऐसे आरोपों और दावों को सावधानी के साथ देखने की जरूरत है।

डिजिटल ढांचे की सुरक्षा बनी चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश तेजी से अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है। ऐसे में साइबर हमलों, डेटा चोरी, रैनसमवेयर और डिजिटल जासूसी जैसे खतरों से निपटने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा विकसित करना आवश्यक होगा।

इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, कानूनी ढांचे को मजबूत करना, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का प्रशिक्षण और महत्वपूर्ण नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाना अहम माना जा रहा है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी नजर

भारत, चीन, अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियां हिंद महासागर क्षेत्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानती हैं। ऐसे में बांग्लादेश की विदेश नीति, तकनीकी साझेदारियां और डिजिटल अवसंरचना भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में बांग्लादेश के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी डिजिटल संप्रभुता और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना होगी, ताकि वह बाहरी प्रतिस्पर्धा के बीच अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सके।


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