प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं के अधिकारों का विरोध करने वालों को इतिहास ने कभी माफ नहीं किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी इस विधेयक का विरोध करेगा, उसे लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्धारण में भागीदारी देने का यह ऐतिहासिक अवसर है और सभी को मिलकर इसका समर्थन करना चाहिए।
लोकसभा में पेश किए गए संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार राजनीतिक दलों ने महिला आरक्षण के समर्थन की बात कही, लेकिन तकनीकी बहानों के जरिए इसे टालते रहे। उनके मुताबिक, लगभग तीन दशकों तक इस महत्वपूर्ण कानून को इसी तरह रोका गया।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष को संदेश देते हुए कहा कि यदि वे इस विधेयक का विरोध करते हैं तो इसका राजनीतिक लाभ सत्तापक्ष को मिल सकता है, लेकिन अगर सभी दल मिलकर इसका समर्थन करते हैं तो यह पूरे देश की जीत होगी। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्हें इसका श्रेय नहीं चाहिए और विधेयक पारित होने के बाद वे विज्ञापन देकर सभी दलों को धन्यवाद देने के लिए तैयार हैं।
पीएम मोदी ने इस मुद्दे को महिलाओं का अधिकार बताते हुए कहा कि यह कोई दान या उपकार नहीं है, बल्कि उनका हक है, जिसे लंबे समय तक रोका गया। उन्होंने इसे एक तरह से “प्रायश्चित” का अवसर बताया और कहा कि अब देश को इस ऐतिहासिक गलती को सुधारना चाहिए।
गौरतलब है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया जा रहा है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, इसे 2029 तक लागू करने की योजना है।
संसद में इस मुद्दे पर बहस जारी है, जहां एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके क्रियान्वयन और परिसीमन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इस विधेयक पर अंतिम फैसला देश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।