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ग्वादर को दुबई बनाने का सपना, लेकिन चुनौतियां बनीं बड़ी बाधा

Published on: April 21, 2026
to convert Gwadar into Dubai
द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : चीन की मदद से विकसित हो रहे ग्वादर बंदरगाह को लेकर पाकिस्तान बड़े सपने देख रहा है। बलूचिस्तान में स्थित इस गहरे पानी वाले बंदरगाह को पाकिस्तान एक क्षेत्रीय ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में पेश कर रहा है और इसे दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बिजनेस हब के तौर पर विकसित करने की योजना बना रहा है।

पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि ग्वादर बंदरगाह देश की अर्थव्यवस्था में करीब 25 अरब डॉलर तक का योगदान दे सकता है। यह बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजना का अहम हिस्सा है, जिसमें चीन करीब 60 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। ग्वादर की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है—यह ईरान की सीमा से करीब 87 किलोमीटर दूर और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जिससे मध्य एशियाई देशों को समुद्री रास्ता मिल सकता है।

ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन नूर-उल-हक बलूच के मुताबिक, बंदरगाह पर अब वाणिज्यिक गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल यहां केवल एक जहाज आया था, जबकि इस साल अब तक दो जहाज आ चुके हैं और जल्द ही पांच और जहाजों के आने की उम्मीद है। उनका दावा है कि ग्वादर, दुबई के जेबेल अली और कोलंबो जैसे बड़े बंदरगाहों को टक्कर दे सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ इन दावों को लेकर सतर्क करते हैं। उनका कहना है कि ग्वादर बंदरगाह अभी तकनीकी और बुनियादी ढांचे की कई सीमाओं से जूझ रहा है। पाकिस्तान शिप्स एजेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन मोहम्मद ए. राजपार के अनुसार, ग्वादर का डिजाइन ड्राफ्ट 14 मीटर है, लेकिन वर्तमान में यह लगभग 12.5 मीटर ही है, जिससे बड़े कंटेनर जहाज वहां नहीं आ सकते।

तुलना करें तो कराची का पोर्ट कासिम, जिसे पाकिस्तान का प्रमुख गहरे पानी का बंदरगाह माना जाता है, उसका ड्राफ्ट करीब 16 मीटर है। ऐसे में ग्वादर की मौजूदा क्षमता उसे बड़े पैमाने पर कंटेनर ट्रैफिक संभालने से रोकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्वादर में संभावनाएं जरूर हैं, लेकिन इसे दुबई जैसे वैश्विक हब में बदलने के लिए बुनियादी ढांचे, तकनीकी सुधार और बड़े निवेश की अभी लंबी जरूरत है।


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