जिलाध्यक्ष महेश्वर मिश्र ‘बबलू’ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को मजबूती से रखा। ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में यदि समय पर चुनाव नहीं कराए गए, तो पंचायत स्तर पर प्रशासनिक शून्यता की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका सीधा असर ग्रामीण विकास कार्यों पर पड़ेगा।
संगठन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। यदि यहां नेतृत्व का अभाव हो जाता है, तो सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित होगा और आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इसलिए चुनाव समय पर कराना बेहद जरूरी है।
प्रधानों ने यह भी तर्क दिया कि उनके कार्यकाल का बड़ा हिस्सा कोविड-19 महामारी के दौरान बीता। इस दौरान ग्राम प्रधानों ने अपने स्तर पर राहत और बचाव कार्यों में अहम भूमिका निभाई। गांवों में लोगों को राशन उपलब्ध कराना, स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग देना और प्रशासन के निर्देशों का पालन कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी बन गई थी। ऐसे में विकास कार्यों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा सका, जिसके कारण कई योजनाएं अधूरी रह गईं।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि यदि उन्हें थोड़ा अतिरिक्त समय या अधिकार मिल जाएं, तो वे इन अधूरे कार्यों को पूरा कर सकते हैं और गांवों के विकास को नई गति दे सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि या तो समय पर चुनाव कराए जाएं या फिर वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाकर उन्हें आवश्यक प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं।
ज्ञापन के दौरान मौजूद प्रधानों ने यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन निरंतर प्रक्रिया है, जिसे बीच में रोका नहीं जा सकता। यदि चुनाव में देरी होती है और प्रधानों के अधिकार समाप्त हो जाते हैं, तो विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ सकते हैं।
संगठन ने सरकार और प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की अपील की है। साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। प्रधानों ने कहा कि वे अपने अधिकारों और गांवों के विकास के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब नजरें प्रशासन और सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि पंचायत चुनाव समय पर कराए जाते हैं या फिर मौजूदा प्रधानों को कार्यकाल विस्तार दिया जाता है।