पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान तहखाने से हथियार बनाने का पूरा सेटअप बरामद हुआ। मौके से 11 तैयार पिस्टल, 12 मैगजीन और भारी मात्रा में उपकरण मिले हैं, जिनका इस्तेमाल अवैध हथियार तैयार करने में किया जा रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह फैक्ट्री पिछले करीब तीन महीनों से संचालित हो रही थी और ऑन-डिमांड हथियार बनाकर अपराधियों तक पहुंचाए जा रहे थे।
मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि अब तक की जांच में इस गिरोह द्वारा 150 से अधिक अवैध पिस्टलों की सप्लाई किए जाने की जानकारी मिली है। ये हथियार विभिन्न अपराधियों को उनकी मांग के अनुसार उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस अब इन हथियारों के खरीदारों की पहचान करने में जुटी है और जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
पूरी कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। स्वाट और सर्विलांस टीम को जानकारी मिली थी कि लोहियानगर क्षेत्र में अवैध हथियारों का कारोबार चल रहा है। इसके बाद पुलिस ने घोसीपुर कट के पास दबिश देकर तीन संदिग्धों को पकड़ा। उनसे पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में असलम, अलाउद्दीन, अनस, शक्ति, मुनीर, आरिश, शिवा शर्मा, गुड्डू सैनी, राजन और रजत शर्मा समेत अन्य शामिल हैं, जो लंबे समय से इस अवैध नेटवर्क से जुड़े हुए थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह का सरगना रहीमुद्दीन अपने अल्लीपुर स्थित मकान के तहखाने से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
फिलहाल मुख्य आरोपी रहीमुद्दीन और उसके सहयोगियों की तलाश जारी है। पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। इस मामले ने स्थानीय थाना पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इतने लंबे समय तक अवैध हथियारों का निर्माण और सप्लाई होने के बावजूद इसकी भनक नहीं लग पाई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।