द देवरिया न्यूज़,काठमांडू : नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के सामने सरकार संभालते ही कई मोर्चों पर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। पदभार ग्रहण किए अभी एक महीना भी नहीं हुआ है कि उन्हें अपने दो मंत्रियों को कैबिनेट से हटाना पड़ा। इसके साथ ही ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा संकट और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच नेपाल की विदेश नीति तय करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।
नई सरकार के गठन के बाद भारत, चीन और अमेरिका—तीनों देशों की नजर नेपाल की नीतियों पर टिकी हुई है। कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर को काठमांडू भेजा, ताकि नेपाल की मौजूदा राजनीतिक दिशा को समझा जा सके। उनके दौरे के बाद चीन भी सक्रिय हो गया और उसके विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों से जुड़ी अधिकारी काओ जिंग काठमांडू पहुंचीं।
इसी बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के तौर पर भारत आने की तैयारी कर रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होने की संभावना है। इसे नेपाल की कूटनीतिक दिशा के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल इस समय एक जटिल भू-राजनीतिक स्थिति में है। वरिष्ठ राजनयिक एस.डी. मुनि के अनुसार, अमेरिका क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करना चाहता है, जबकि उसे यह भरोसा नहीं है कि भारत अकेले इस भूमिका को निभा पाएगा। अमेरिका तिब्बत से जुड़े मुद्दों और अपने एमसीसी (MCC) समझौते व अन्य कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में भी रुचि रखता है।
वहीं, चीन नेपाल में किसी भी तरह की अस्थिरता को लेकर सतर्क है, खासकर तिब्बत और दलाई लामा से जुड़े मुद्दों को लेकर। चीन नहीं चाहता कि नेपाल की जमीन से ‘मुक्त तिब्बत’ जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिले। हाल ही में नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग के सरकार से बाहर होने को चीन के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक इंद्र अधिकारी का कहना है कि भौगोलिक रूप से नेपाल तिब्बत के ज्यादा करीब है, इसलिए चीन हमेशा नेपाल की गतिविधियों पर नजर बनाए रखता है। वहीं, नेपाली पत्रकार आकांक्षा शाह के अनुसार, अमेरिका अब नेपाल को केवल भारत के नजरिए से नहीं देख रहा, जिससे क्षेत्रीय समीकरण और जटिल हो गए हैं।
भारत और नेपाल के संबंधों पर बात करते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों को कनेक्टिविटी, ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्रों में स्पष्ट रणनीति बनानी होगी। साथ ही, भारत को नेपाल की नई नेतृत्व शैली और अपेक्षाओं को समझते हुए अपने प्रोजेक्ट समय पर पूरे करने होंगे।
कुल मिलाकर, बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को साधने की है। आने वाले समय में उनकी विदेश नीति यह तय करेगी कि नेपाल क्षेत्रीय राजनीति में किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
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