द देवरिया न्यूज़,मास्को/लंदन : यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने नाटो देशों की सीमाओं के निकट अपनी सैन्य तैयारियों को तेज कर दिया है। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में दावा किया गया है कि रूस ने पिछले दो वर्षों में कई सैन्य ठिकानों का विस्तार किया है। इन तस्वीरों के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में नए बैरक, हथियार भंडारण केंद्र और सैन्य वाहनों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं विकसित की गई हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, रूस का पेचांगा सैन्य अड्डा, जो नॉर्वे की सीमा से करीब पांच मील की दूरी पर स्थित है, तेजी से विकसित किया जा रहा है। वहीं फिनलैंड और नॉर्वे से सटे मुरमंस्क क्षेत्र में भी सैन्य ढांचे का विस्तार किया गया है, जहां अब लगभग 17 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की क्षमता विकसित होने की बात कही जा रही है।
एस्टोनिया सीमा के पास भी बढ़ी गतिविधि
सैटेलाइट तस्वीरों में यह भी दावा किया गया है कि नाटो सदस्य एस्टोनिया की सीमा के निकट रूस ने बड़ी संख्या में सैन्य वाहनों और उपकरणों की तैनाती की है। इससे बाल्टिक क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
पूर्व ब्रिटिश सैन्य अधिकारी कर्नल रिचर्ड केंप ने कहा कि रूस के संभावित खतरे को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अक्सर ऐसे कदम उठाते हैं जिनकी पहले से व्यापक उम्मीद नहीं की जाती।
उन्होंने कहा कि यूरोप और ब्रिटेन को अपनी सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि वर्तमान में यूक्रेन युद्ध जारी रहने के कारण रूस के लिए नाटो देशों के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान की संभावना सीमित दिखाई देती है।
ब्रिटेन में भी बढ़ी सुरक्षा चिंता
ब्रिटेन के पूर्व रक्षा मंत्री जॉन हेली के हवाले से रिपोर्टों में दावा किया गया है कि खुफिया आकलनों के अनुसार भविष्य में रूस से सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं। उन्होंने रक्षा तैयारियों को मजबूत करने और सैन्य संसाधनों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
हेली ने कहा कि यदि किसी देश की सेनाओं के पास पर्याप्त सैनिक, आधुनिक हथियार और संसाधन नहीं होंगे, तो किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है।
रूस ने खारिज किए आरोप
दूसरी ओर, रूस ने बार-बार इन आरोपों को खारिज किया है कि उसकी नाटो देशों पर हमला करने की कोई योजना है। मॉस्को का कहना है कि सीमा क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों और रक्षा रणनीति का हिस्सा हैं।
दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है तैनाती
कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों में सैन्य ढांचे का विस्तार रूस की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पूर्व सैन्य खुफिया अधिकारी फिलिप इन्ग्राम के अनुसार, रूस की यह गतिविधि तत्काल सैन्य कार्रवाई का संकेत नहीं है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा और रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की जा रही तैयारी भी हो सकती है।
यूक्रेन युद्ध जारी रहने के बीच रूस और नाटो देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने यूरोप में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। फिलहाल सभी पक्ष स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि सीमा क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
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