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टीएम और गवर्नर के बीच टकराव पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, दो विश्वविद्यालयों के लिए समिति सुझाएगी नाम

Published on: December 12, 2025
Clash between TM and Governor

द देवरिया न्यूज़,केरल : केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और राज्यपाल व कुलाधिपति राजेंद्र अर्लेकर के बीच चल रहे टकराव पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हस्तक्षेप करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अदालत ने रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली समिति को निर्देश दिया है कि वह दो तकनीकी विश्वविद्यालयों के लिए एक-एक नाम सुझाकर अगले बुधवार तक सीलबंद लिफाफे में अदालत में जमा करे। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।

यह विवाद एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ डिजिटल साइंसेज, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी में उप-कुलपति (VC) नियुक्ति से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कई प्रयासों के बावजूद मुख्यमंत्री और राज्यपाल किसी भी सहमति पर नहीं पहुंच सके।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि:

  • जस्टिस धूलिया समिति मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच हुए पत्राचार का अध्ययन करे।

  • प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए एक नाम सुझाए।

  • रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अगले गुरुवार तक अदालत में भेजी जाए।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पहले समिति बनाकर समाधान निकालने के बावजूद राज्यपाल द्वारा रिपोर्ट न देखने पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अब तक मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच केवल पत्राचार हुआ है, लेकिन किसी ठोस निर्णय की दिशा में कदम नहीं उठाया गया।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कोर्ट को बताया कि राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है, मगर सुप्रीम कोर्ट ने वह पत्र देखने से इनकार कर दिया।

केरल सरकार का तर्क

केरल सरकार की ओर से पेश सीनियर वकील जयदीप गुप्ता ने कहा:

  • 10 दिसंबर को कानून मंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री ने राज्यपाल से मुलाकात की।

  • मुख्यमंत्री को केवल एक नाम पर आपत्ति थी।

  • बाकी नामों पर राज्यपाल ने कोई आपत्ति नहीं जताई।

  • इसके बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

पृष्ठभूमि: लंबा खिंचता विवाद

  • 28 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल द्वारा धूलिया समिति की रिपोर्ट न खोलने पर नाराजगी जताई थी।

  • समिति ने 18 अगस्त के आदेश के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी थी।

  • मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट के आधार पर VC नियुक्ति के नाम भेजे, लेकिन राज्यपाल ने निर्णय नहीं लिया।

2 सितंबर को राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन कर मांग की थी कि VC चयन प्रक्रिया में मुख्यमंत्री की भूमिका खत्म कर दी जाए, क्योंकि विश्वविद्यालय कानून में उनकी भूमिका नहीं है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच लगातार बढ़ते टकराव को देखते हुए जस्टिस धूलिया पैनल बनाया था, ताकि VC नियुक्ति के लिए नामों की शॉर्टलिस्टिंग की जा सके।


इसे भी पढ़ें : देवरिया में होगा विश्व भोजपुरी सम्मेलन: 13–14 दिसंबर को सजेगा ‘संस्कृति पर्व 25


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