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होर्मुज संकट के बीच भारत अलर्ट, 40 अहम जहाजों को सुरक्षित निकालने की तैयारी तेज

Published on: May 1, 2026
India alert amid Hormuz crisis
द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : अमेरिका-ईरान तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते खतरे का असर अब भारत की ऊर्जा और आपूर्ति प्रणाली पर साफ दिखाई देने लगा है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर कमर्शियल ट्रैफिक के सामान्य होने की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में भारत सरकार ने हालात से निपटने के लिए आपात रणनीति लागू कर दी है।
शिपिंग मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर भारत आने वाले करीब 40 “प्राथमिकता वाले जहाजों” की सूची तैयार की है। इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ओमान के समुद्री क्षेत्र का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य के उत्तरी हिस्से पर ईरान का नियंत्रण है, जबकि दक्षिणी हिस्सा ओमान के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है।
इन 40 जहाजों में से 18 जहाज ऊर्जा उत्पादों से लदे हुए हैं, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा 16 जहाजों में उर्वरक (खाद) है, जो आने वाले खरीफ सीजन के लिए जरूरी है। शेष जहाजों में अन्य आवश्यक सामान हैं। इन जहाजों को सुरक्षित निकालना देश की ऊर्जा सुरक्षा और कृषि व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है।
सरकार ने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के जरिए पश्चिम एशिया के लिए समुद्री सेवाएं दोबारा शुरू करने की योजना पर भी काम तेज कर दिया है। इसका उद्देश्य वहां फंसे माल को भारत तक पहुंचाना और सप्लाई चेन को बनाए रखना है। अधिकारियों के अनुसार, SCI का एक जहाज 3,000 से 4,000 कंटेनरों की क्षमता के साथ UAE के बंदरगाहों तक सामान पहुंचा सकता है, जहां से इसे सड़क मार्ग से आगे भेजा जाएगा।
मंगलवार को शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें इस संकट के असर और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा की गई। बैठक में देश की शिपिंग क्षमता को तुरंत बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
सरकार ने इस वित्त वर्ष में 62 नए जहाज जोड़ने का रोडमैप तैयार किया है, जिसके लिए 51,383 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इससे 2.85 मिलियन ग्रॉस टन अतिरिक्त क्षमता विकसित होगी। इसमें कंटेनर जहाज, कच्चे तेल के टैंकर, एलपीजी कैरियर और ग्रीन टग शामिल होंगे।
वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। 4 मई को एक अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें दीर्घकालिक “लचीलापन योजना” पर चर्चा की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के वैश्विक संकटों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
होर्मुज संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को अपनी समुद्री और ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम उठाने होंगे।

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