जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश देते हुए 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। उन्होंने ग्राम पंचायत सचिवालय में राजस्व और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर जांच की विस्तृत रूपरेखा तैयार की। साथ ही, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अधिवक्ता विजेंद्र सिंह बरहज तहसील में सक्रिय रूप से वकालत करते थे। बताया जा रहा है कि गांव में सरकारी चकनाली की जमीन पर रास्ता निर्माण को लेकर विवाद चल रहा था। परिजनों का आरोप है कि घटना के दिन तत्कालीन एसडीएम विपिन द्विवेदी की मौजूदगी में प्रधान पक्ष के लोगों ने विजेंद्र सिंह के साथ धक्का-मुक्की की, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई।
जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने लोगों से जांच में सहयोग करने की अपील की और चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति आरोपियों को बचाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मृतक के पुत्र सिद्धार्थ सिंह ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, अधिवक्ता संघ ने घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर नाराजगी जताई है और जल्द कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन का कहना है कि पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में टीमें लगातार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हैं और जल्द ही ठोस कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान मौके पर अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, राजस्व एवं पुलिस विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिससे क्षेत्र में माहौल संवेदनशील बना हुआ है।