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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत बना रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक, चीन शीर्ष पर

Published on: November 17, 2025
India amid Russia-Ukraine war

द देवरिया न्यूज़/नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन इसके बीच भारत ने अक्टूबर माह में रूस से कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बनकर अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है। हेलसिंकी स्थित सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की नवीनतम रिपोर्ट बताती है कि भारत ने अक्टूबर में रूस से लगभग 2.5 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा। इस सूची में चीन 3.7 अरब डॉलर के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जीवाश्म ईंधन की कुल खरीद में भारत का आयात 3.1 अरब डॉलर रहा, जो चीन के कुल 5.8 अरब डॉलर की तुलना में कम है। इसके बावजूद भारत और चीन दोनों पर पश्चिमी देशों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस से तेल खरीदकर ये दोनों देश अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध क्षमता को वित्तीय मदद पहुंचा रहे हैं।

तुर्की तीसरे और यूरोपीय संघ चौथे स्थान पर खिसका

CREA की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की 2.7 अरब डॉलर के जीवाश्म ईंधन आयात के साथ तीसरे स्थान पर रहा। वहीं, यूरोपीय संघ (EU) लगातार घटते आयात के कारण 1.1 अरब डॉलर के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से लगाई जा रही पाबंदियों का एक बड़ा असर यह है कि यूरोपीय संघ पिछले महीनों की तुलना में रूसी बाजार से खुद को तेजी से अलग कर रहा है।

अमेरिका का बढ़ता दबाव और नए प्रतिबंध

पिछले महीने अमेरिका ने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों—रोसनेफ्ट और लुकोइल— पर कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। रिपोर्ट कहती है कि इसका असर भारत और चीन के दिसंबर के आयात आंकड़ों में देखने को मिल सकता है क्योंकि दोनों देशों की बड़ी रिफाइनिंग कंपनियां इन ऊर्जा दिग्गजों पर निर्भर हैं।

कोयले और गैस में भी चीन सबसे बड़ा खरीदार

ऊर्जा आयात की बात सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। चीन अभी भी रूसी कोयले का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, जबकि इस मामले में भारत और तुर्की उससे काफी पीछे हैं।
अक्टूबर महीने में भारत ने 35.1 करोड़ डॉलर का कोयला और 22.2 करोड़ डॉलर के तेल उत्पाद खरीदे, जो उसके कुल आयात का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

तुर्की रूसी तेल उत्पादों का सबसे बड़ा आयातक

रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की ने अक्टूबर में 95.7 करोड़ डॉलर के रूसी तेल उत्पाद खरीदे, जिनमें से लगभग आधा हिस्सा डीजल का था। इसके अलावा तुर्की ने 92.9 करोड़ डॉलर की पाइपलाइन गैस और 57.2 करोड़ डॉलर का कच्चा तेल भी आयात किया।

यूरोपीय संघ ने अक्टूबर में 82.4 करोड़ डॉलर का रूसी LNG और पाइपलाइन गैस खरीदी, साथ ही 31.1 करोड़ डॉलर का कच्चा तेल भी आयात किया। LNG को ठंडा करके तरल रूप में बदला जाता है ताकि स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट आसान हो सके।

दक्षिण कोरिया पांचवें स्थान पर

रूसी जीवाश्म ईंधन का पांचवां सबसे बड़ा आयातक दक्षिण कोरिया रहा। उसके कुल आयात में 53% (21.5 करोड़ डॉलर) हिस्सा कोयले का था। इसके बाद 10.7 करोड़ डॉलर का LNG और 8 करोड़ डॉलर के तेल उत्पाद शामिल रहे।


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