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ट्रंप बोले- ईरान के पास भी हो सकती हैं बैलिस्टिक मिसाइलें, बयान से नई बहस शुरू

Published on: June 19, 2026
Trump said—Iran might also possess it.

द  देवरिया न्यूज़,पेरिस। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि क्षेत्र के अन्य देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो ईरान को पूरी तरह इससे वंचित रखना उचित नहीं होगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब और कतर जैसे देशों के पास भी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। ऐसे में समानता के आधार पर ईरान के पास सीमित मिसाइल क्षमता होना गलत नहीं माना जाना चाहिए।

“मिसाइलें परमाणु हथियार नहीं हैं”

ट्रंप ने बैलिस्टिक मिसाइलों और परमाणु हथियारों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि मिसाइलें गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन वे परमाणु हथियारों की तरह पूरी दुनिया के लिए खतरा नहीं बनतीं।

उन्होंने कहा,

“यदि सऊदी अरब और कतर के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो मुझे लगता है कि ईरान के पास भी उनका होना ठीक है। मिसाइलें समस्या नहीं हैं। वे किसी क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन पूरे ग्रह को नष्ट नहीं करतीं।”

इजरायल की चिंताएं बढ़ सकती हैं

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान इजरायल के लिए चिंता का विषय बन सकता है। इजरायल लंबे समय से ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताता रहा है। इजरायली नेतृत्व का तर्क रहा है कि ईरान का मिसाइल नेटवर्क उसकी सैन्य क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है।

हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए समझौते में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान शामिल नहीं बताया गया है।

अमेरिका-ईरान समझौते पर हुए हस्ताक्षर

ट्रंप के बयान के कुछ घंटे बाद अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर की जानकारी सामने आई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने फ्रांस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।

वहीं ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के हस्ताक्षर करने की जानकारी दी गई। इससे पहले दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने डिजिटल माध्यम से भी समझौते की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था।

क्षेत्रीय राजनीति पर नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिका की ईरान नीति में संभावित बदलाव का संकेत हो सकता है। हालांकि आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम सहमति क्या रूप लेती है और इसका मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।



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