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सिंधु जल संधि पर भारत का रुख बरकरार, विदेश मंत्रालय बोला- आतंकवाद बंद होने तक निलंबन रहेगा जारी

Published on: July 4, 2026
India's stance on Indus Water Treaty

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty-IWT) को लेकर उसका रुख नहीं बदला है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह और विश्वसनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक संधि पर भारत द्वारा लगाया गया निलंबन जारी रहेगा। विदेश मंत्रालय के इस बयान से साफ संकेत मिला है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं है।

विदेश मंत्रालय ने दोहराया भारत का आधिकारिक रुख

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण पहले जैसा ही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से जारी सीमा-पार आतंकवाद के कारण सिंधु जल संधि का सामान्य रूप से संचालन संभव नहीं है। प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान को पहले विश्वसनीय और स्थायी तरीके से सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन समाप्त करना होगा, तभी आगे किसी प्रकार की प्रगति पर विचार किया जा सकता है।

पहलगाम हमले के बाद लिया गया था निर्णय

भारत ने यह रुख उस समय अपनाया था जब पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद केंद्र सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। उस समय सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया था कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।” ताजा बयान को उसी नीति की निरंतरता माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का स्पष्ट संदेश

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष भी यह स्पष्ट कर दिया है कि सीमा-पार आतंकवाद और द्विपक्षीय जल सहयोग को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। भारत का मानना है कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले माहौल में सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) में सिंधु जल संधि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा जारी है और पाकिस्तान लगातार इस विषय को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है।

पाकिस्तान पर बढ़ सकता है दबाव

विश्लेषकों का मानना है कि भारत के इस स्पष्ट रुख से पाकिस्तान पर कूटनीतिक और रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है। पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था और जलविद्युत परियोजनाओं का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली के जल पर निर्भर है। हालांकि, भविष्य में इस संधि का क्या स्वरूप होगा और इसका व्यावहारिक प्रभाव कितना पड़ेगा, यह दोनों देशों की नीतियों, तकनीकी व्यवस्थाओं तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं पर भी निर्भर करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

भारत लगातार यह कहता रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। विदेश मंत्रालय के ताजा बयान से यह भी संकेत मिला है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इसी आधार पर सिंधु जल संधि को लेकर अपने निर्णयों का मूल्यांकन कर रही है। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक भारत का वर्तमान रुख यथावत रहेगा।

आगे क्या?

भारत के इस दोटूक रुख के बाद दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि को लेकर गतिरोध फिलहाल जारी रहने के संकेत हैं। आने वाले समय में पाकिस्तान की ओर से उठाए जाने वाले कदम, दोनों देशों के संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति इस मुद्दे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


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