द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। गठबंधन का दावा है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप की आशंका बढ़ी है। इसी क्रम में विपक्ष ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर चुनावी रोल के स्पेशल समरी रिविजन (SIR) की प्रक्रिया पर रोक लगाने की अपील की है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण विधानसभा चुनाव से काफी पहले किया जाना चाहिए और चुनाव के निकट इस प्रक्रिया को शुरू करना उचित नहीं है।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की उठाई मांग
विपक्षी गठबंधन ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई है। गठबंधन का आरोप है कि हाल के वर्षों में हुए कुछ विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर संदेह पैदा हुए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग लगातार यह कहता रहा है कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी कार्यप्रणाली पारदर्शी एवं न्यायिक जांच में भी सही पाई गई है।
CJI को लिखा पत्र
INDIA गठबंधन की ओर से 28 जून को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सामान्य परिस्थितियों में न्यायपालिका को इस प्रकार का पत्र नहीं लिखा जाता, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा करना आवश्यक महसूस हुआ। पत्र में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग की कुछ कार्रवाइयों, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और अन्य प्रशासनिक कदमों से निष्पक्ष चुनाव को लेकर आशंकाएं पैदा हुई हैं। गठबंधन का कहना है कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास कमजोर होता है तो इसका असर पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट पहले दे चुका है टिप्पणी
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले स्पेशल समरी रिविजन (SIR) की प्रक्रिया को संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप बताते हुए कह चुका है कि मतदाता सूची का नियमित और निष्पक्ष पुनरीक्षण स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इसी संदर्भ में विपक्ष ने अब मुख्य न्यायाधीश से पुनर्विचार करने और अपनी चिंताओं पर ध्यान देने का अनुरोध किया है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
विपक्षी गठबंधन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। पत्र में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसले के बाद केंद्र सरकार द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों को लेकर विपक्ष पहले भी अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है। गठबंधन का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। हालांकि केंद्र सरकार इस विषय पर पहले स्पष्ट कर चुकी है कि नियुक्तियां संसद द्वारा पारित कानून के अनुसार की जा रही हैं।
चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप
पत्र में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग पर निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। गठबंधन का आरोप है कि आयोग के कुछ फैसलों से सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचने की आशंका पैदा हुई है। हालांकि, चुनाव आयोग समय-समय पर यह दोहराता रहा है कि वह संविधान के दायरे में रहते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन करता है तथा किसी भी राजनीतिक दल के प्रति उसका कोई पक्षपात नहीं है।
राजनीतिक विवाद तेज होने के आसार
लोकसभा चुनाव के बाद चुनावी सुधार, मतदाता सूची, ईवीएम और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। विपक्ष जहां चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग कर रहा है, वहीं केंद्र सरकार और चुनाव आयोग अब तक चुनावी व्यवस्था को सुरक्षित और विश्वसनीय बताते रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बहस और तेज होने की संभावना है।
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