Breaking News
ट्रेंडिंग न्यूज़देवरिया न्यूज़उत्तर प्रदेश न्यूज़राष्ट्रीय न्यूज़अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़राजनीतिक न्यूज़अपराधिक न्यूज़स्पोर्ट्स न्यूज़एंटरटेनमेंट न्यूज़बिज़नस न्यूज़टेक्नोलॉजी अपडेट लेटेस्ट गैजेट अपडेटमौसम

पाकिस्तान पर कर्ज का पहाड़ : 81.93 ट्रिलियन रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सरकारी ऋण, अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

Published on: June 28, 2026
A mountain of debt on Pakistan

द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान पर सरकारी कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 तक पाकिस्तान की केंद्र सरकार का कुल कर्ज बढ़कर 81.93 ट्रिलियन रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। केवल अप्रैल महीने में ही सरकारी ऋण में 1.4 ट्रिलियन रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे देश की वित्तीय स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

अप्रैल में रिकॉर्ड बढ़ा सरकारी कर्ज

बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार कर्ज के सहारे चल रही है। सरकार बजट घाटा पूरा करने, पुराने कर्ज का भुगतान करने और सरकारी खर्चों को चलाने के लिए लगातार नए कर्ज ले रही है। यही वजह है कि कुल सरकारी ऋण अब देश के इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।

चालू वित्त वर्ष में 4 ट्रिलियन रुपये से अधिक बढ़ा ऋण

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दस महीनों में पाकिस्तान के कुल सरकारी कर्ज में 4 ट्रिलियन रुपये से अधिक की वृद्धि हुई है।

इसमें:

  • घरेलू कर्ज: 3.6 ट्रिलियन रुपये से अधिक
  • विदेशी कर्ज: 400 बिलियन रुपये से ज्यादा

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की बढ़ती उधारी यह दर्शाती है कि देश की आय और खर्च के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है।

कर्ज चुकाने के लिए फिर लिया जा रहा नया कर्ज

आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान लंबे समय से एक ऐसे चक्र में फंस गया है, जहां पुराने कर्ज का भुगतान करने के लिए नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं। लगातार सरकारें राजस्व बढ़ाने और खर्च नियंत्रित करने के बजाय उधारी पर निर्भर रही हैं। कमजोर टैक्स संग्रह, बढ़ता वित्तीय घाटा और धीमी आर्थिक वृद्धि ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

विश्लेषकों का कहना है कि बढ़ते कर्ज का सबसे बड़ा नुकसान विकास कार्यों पर पड़ रहा है। सरकार की बड़ी राशि अब ब्याज और कर्ज चुकाने में खर्च हो रही है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण जैसी योजनाओं के लिए संसाधन कम पड़ रहे हैं।

पश्चिम एशिया का तनाव भी बना नई चुनौती

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए महंगे तेल से विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञों ने सुझाए सुधार

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को इस संकट से बाहर निकलने के लिए कई बड़े कदम उठाने होंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • टैक्स संग्रह बढ़ाना
  • सरकारी खर्चों पर सख्त नियंत्रण
  • आर्थिक एवं संरचनात्मक सुधार लागू करना
  • कर्ज पर निर्भरता कम करना
  • निवेश और उद्योग को बढ़ावा देना

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते व्यापक आर्थिक सुधार नहीं किए, तो आने वाले वर्षों में पाकिस्तान को और गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


इसे भी पढ़ें : चीन के राजदूत के लेख की 3 बड़ी बातें: नेपाल के लिए क्या है चीन का नया रोडमैप?


Discover more from thedeoria.news : : Voice of rural India - ग्रामीण भारत की आवाज़

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Reply

error: Content is protected !!