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कच्चातीवू द्वीप विवाद फिर गरमाया : बीजेपी का कांग्रेस पर हमला, 1974 के फैसले को बताया ‘ऐतिहासिक काला अध्याय’

Published on: June 28, 2026
Katchatheevu island dispute flares up again.

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : कच्चातीवू द्वीप को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा ने 1974 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा श्रीलंका की कच्चातीवू द्वीप पर संप्रभुता को मान्यता देने के फैसले को कांग्रेस शासन का “ऐतिहासिक काला अध्याय” बताया और आरोप लगाया कि उस समय भारत के राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया था।

सुधांशु त्रिवेदी ने साधा कांग्रेस पर निशाना

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस वार्ता में कहा कि 26 जून 1974 का दिन कांग्रेस के इतिहास का एक और विवादित अध्याय माना जाएगा।

उन्होंने कहा,

“1974 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तमिलनाडु के निकट स्थित कच्चातीवू द्वीप पर श्रीलंका की संप्रभुता स्वीकार कर ली। इसके बाद से तमिलनाडु के मछुआरों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।”

तमिलनाडु के मछुआरों का मुद्दा उठाया

भाजपा ने आरोप लगाया कि कच्चातीवू समझौते के बाद भारतीय मछुआरों की पारंपरिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने द्वीप पर स्थित सेंट एंथनी चर्च का उल्लेख करते हुए दावा किया कि भारतीय नाविकों को वहां जाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

कांग्रेस पर ‘राष्ट्रीय हितों से समझौते’ का आरोप

भाजपा नेता ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में कई ऐसे फैसले हुए, जिन्हें पार्टी राष्ट्रीय हितों के खिलाफ मानती है। उन्होंने अपने संबोधन में विभाजन, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके), अक्साई चिन और कच्चातीवू जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की नीतियों की आलोचना की।

क्या है कच्चातीवू द्वीप?

कच्चातीवू पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) में स्थित एक छोटा निर्जन द्वीप है, जो भारत के तमिलनाडु तट और श्रीलंका के बीच स्थित है।

  • वर्ष 1974 में भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमा समझौते के तहत भारत ने इस द्वीप पर श्रीलंका की संप्रभुता को स्वीकार किया।
  • इसके बाद यह मुद्दा समय-समय पर भारतीय राजनीति, विशेषकर तमिलनाडु की राजनीति में उठता रहा है।
  • मछुआरों की गिरफ्तारी और समुद्री सीमा विवाद के कारण यह विषय आज भी संवेदनशील बना हुआ है।

केरल सरकार की शराब नीति पर भी बीजेपी का हमला

प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा ने केरल की कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार की शराब नीति की भी आलोचना की। पार्टी ने आरोप लगाया कि कम अल्कोहल वाली शराब पर एक्साइज ड्यूटी 251 प्रतिशत से घटाकर 121 प्रतिशत किए जाने से शराब की खपत बढ़ सकती है और इससे राज्य के राजस्व पर भी असर पड़ेगा। सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि राज्य में नशे की समस्या पहले से गंभीर है और ऐसी नीतियां युवाओं को गलत दिशा में ले जा सकती हैं।

राजनीतिक बहस फिर तेज

कच्चातीवू का मुद्दा हाल के वर्षों में भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रमुख राजनीतिक विवादों में शामिल रहा है। भाजपा इसे राष्ट्रीय हितों से जुड़ा विषय बताती रही है, जबकि कांग्रेस ने पहले भी अपने फैसले का अलग पक्ष रखा है। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।


इसे भी पढ़ें : पासपोर्ट पर विवाद: ओवैसी ने केंद्र सरकार को घेरा, पूछा- नागरिकता साबित करने के लिए फिर कौन सा दस्तावेज चाहिए?


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