इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कूटर ने बताया कि मार्च में कनाडा के प्रधानमंत्री माइक कार्नी की भारत यात्रा के दौरान 62 बिंदुओं वाले संयुक्त बयान पर सहमति बनी थी, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया। इसके तहत भारत ने अगले 10 वर्षों में 2.6 बिलियन डॉलर का यूरेनियम खरीदने का समझौता भी किया है।
कूटर के मुताबिक, कनाडा अब अपने ऊर्जा निर्यात को अमेरिका से आगे बढ़ाकर भारत जैसे देशों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि एलपीजी निर्यात को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और 2027 तक इसकी शुरुआत संभव है। कनाडा इस दिशा में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि हालांकि कनाडा प्राकृतिक गैस का बड़ा उत्पादक है, लेकिन निर्यात के मामले में अभी पीछे है, क्योंकि अब तक उसका अधिकांश निर्यात अमेरिका तक सीमित रहा है। अब कनाडा नए टर्मिनल बनाकर अन्य देशों, खासकर भारत, तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है।
कनाडा के 90% से अधिक कच्चे तेल का निर्यात अभी अमेरिका को होता है, लेकिन ओटावा अब अपने बाजार का विविधीकरण करना चाहता है। कूटर ने कहा कि भारत की रिफाइनरियां कनाडा के भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं बढ़ती हैं।
व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इसे दोगुना या उससे अधिक बढ़ाने की संभावनाएं हैं। कनाडा पोटाश और अन्य उर्वरकों के निर्यात को भी बढ़ाना चाहता है।
कूटर ने भारत में कनाडाई निवेश का जिक्र करते हुए बताया कि कनाडा के पेंशन फंड्स ने भारत में अब तक करीब 110 बिलियन डॉलर का निवेश किया है और इसमें आगे और वृद्धि की उम्मीद है।
इसके साथ ही उन्होंने लोगों के बीच मजबूत रिश्तों को भी अहम बताया। उनके अनुसार, कनाडा में करीब 4 लाख भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जो अन्य कई देशों की तुलना में अधिक हैं।