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माघ मेला 2026 का लोगो: संगम, ज्योतिष और सनातन परंपरा की दिव्य ऊर्जा का प्रतीक

Published on: December 29, 2025
Magh Mela 2026 logo
द देवरिया न्यूज़,अध्यात्म : प्रयागराज में आयोजित होने वाले माघ मेला–2026 के लिए जारी किया गया प्रतीक चिन्ह (लोगो) तीर्थराज प्रयागराज की आध्यात्मिक महिमा, संगम की तपोभूमि और माघ मास के ज्योतिषीय एवं धार्मिक महत्व को समग्र रूप से प्रस्तुत करता है। यह लोगो माघ मेले की आध्यात्मिक चेतना, ग्रह-नक्षत्रों की गणना और संगम पर होने वाले अनुष्ठानों के गहरे अर्थ को दर्शाता है।

लोगो में सूर्य और चंद्रमा की कलाओं का समावेश भारतीय ज्योतिष परंपरा का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की विशेष स्थिति ही माघ मेले के आयोजन का आधार है। चंद्रमा लगभग 27.3 दिनों में 27 नक्षत्रों की परिक्रमा करता है और इसी सूक्ष्म खगोलीय गणना पर महाकुंभ से लेकर माघ मेला तक की तिथियां निर्धारित होती हैं। चंद्रमा की कलाओं को मानव जीवन, मानसिक ऊर्जा और आध्यात्मिक साधना से जोड़ा जाता है।

मकर संक्रांति के साथ सूर्य का मकर राशि में प्रवेश त्रिवेणी संगम को विशेष ऊर्जा प्रदान करता है। माघ मास में मकरस्थ सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त ऊर्जा, विशेष रूप से मौनी अमावस्या के दिन, संगम स्नान और दान करने वालों के लिए कल्याणकारी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान संगम में स्नान करने से ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा मानव शरीर में सक्रिय होकर रोग और शोक का नाश करती है।

लोगो में कल्पवास की परंपरा का भी गहन संकेत है। संगम तट पर एक माह तक निवास कर साधना करना भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। जैसे शुक्ल पक्ष में चंद्रमा अमावस्या से पूर्णिमा की ओर बढ़ता है, वैसे ही साधक की साधना भी धीरे-धीरे पूर्णता की ओर अग्रसर होती है। माघ स्नान पर्वों की तिथियां चंद्र कलाओं के संतुलन के आधार पर तय की जाती हैं, जो इस माह की आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाती हैं।

माघ मास को अनुशासन, भक्ति और गहन साधना का काल माना गया है। इस दौरान स्नान, दान, तपस्या और कल्पवास जैसे कार्य व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से निरोगी बनाते हैं तथा उसे दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण करते हैं।

लोगो में प्रयागराज के अविनाशी अक्षयवट का भी प्रतीकात्मक चित्रण है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास है। अक्षयवट के दर्शन मात्र से मोक्ष का मार्ग सुगम होने की आस्था है, इसलिए कल्पवासियों के लिए इसका विशेष महत्व है। इसके साथ ही संगम क्षेत्र में आने वाले साइबेरियन पक्षियों को दर्शाकर पर्यावरणीय विशेषता को भी उभारा गया है।

लोगो पर अंकित श्लोक ‘माघे निमज्जनं यत्र पापं परिहरेत् ततः’ माघ मास का दिव्य संदेश देता है, जिसका अर्थ है कि माघ महीने में संगम स्नान करने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है। इस प्रकार माघ मेला–2026 का प्रतीक चिन्ह आस्था, ज्योतिष, प्रकृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।



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