द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली/ढाका : लाल सागर में हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इस पहल के तहत कई देशों से बातचीत जारी है और रिपोर्टों के अनुसार इस संभावित गठबंधन में बांग्लादेश और पाकिस्तान के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन और ईरान के प्रभाव पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।
सऊदी में बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल की अहम बैठक
नॉर्थईस्ट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सऊदी अरब भेजा है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के महानिदेशक रियर एडमिरल मोहम्मद मुनिबुर रहमान कर रहे हैं। उनके साथ कोस्ट गार्ड मुख्यालय के संचालन निदेशक कमांडर मोहम्मद हसीन रजा भी शामिल हैं।
यह बैठक 29 जुलाई से 1 अगस्त तक आयोजित हो रही है, जबकि आधिकारिक यात्रा 3 अगस्त तक निर्धारित की गई है। यह निमंत्रण रॉयल सऊदी नेवी की ओर से ढाका स्थित सऊदी दूतावास और सऊदी रक्षा मंत्रालय के माध्यम से भेजा गया था।
बाब-अल-मंदेब की सुरक्षा पर रहेगा फोकस
बैठक का मुख्य एजेंडा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है तथा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के महीनों में इस मार्ग से गुजरने वाले कई व्यापारिक जहाज हूती विद्रोहियों के निशाने पर आए हैं, जिससे इसकी सामरिक अहमियत और बढ़ गई है।
पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान पहले से ही सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग बनाए हुए है। ऐसे में यदि वह इस नए समुद्री सुरक्षा गठबंधन का हिस्सा बनता है तो सऊदी की क्षेत्रीय रणनीति को और मजबूती मिल सकती है। वहीं, बांग्लादेश की भागीदारी भी हिंद महासागर और लाल सागर क्षेत्र में उसकी बढ़ती सामरिक सक्रियता का संकेत मानी जा रही है।
ईरान और हूती विद्रोहियों पर बढ़ेगा दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गठबंधन अस्तित्व में आता है तो इसका सबसे अधिक असर ईरान पर पड़ सकता है। यमन के हूती विद्रोहियों को ईरान का करीबी सहयोगी माना जाता है और लाल सागर में उनकी गतिविधियां लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई हैं।
इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने हाल ही में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी। इसके अलावा रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि हूती संगठन दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों से शुल्क वसूलने की योजना पर भी विचार कर रहा है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर नजर
हालांकि प्रस्तावित समुद्री गठबंधन का अंतिम स्वरूप अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन सऊदी अरब की इस पहल को लाल सागर में बढ़ते सुरक्षा संकट से निपटने की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कोशिश माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसमें किन-किन देशों की औपचारिक भागीदारी होती है, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।
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