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देवरिया मेडिकल कॉलेज में हड़कंप: ओपीडी बिल्डिंग की पानी टंकी में मिला युवक का शव, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Published on: October 7, 2025
Water in Deoria Medical College
द देवरिया न्यूज़ : जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज में सोमवार की शाम उस समय हड़कंप मच गया जब ओपीडी बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल पर बनी पानी की टंकी में एक युवक का शव तैरता हुआ मिला। यह घटना सामने आते ही मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। शव की बरामदगी के बाद वार्ड में भर्ती मरीजों और परिजनों के बीच अफरा-तफरी मच गई। करीब पांच घंटे तक चली रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद फायर ब्रिगेड की टीम ने शव को बाहर निकाला।
मेडिकल कॉलेज परिसर में यह घटना सोमवार शाम लगभग चार बजे सामने आई। मरीजों ने बताया कि दोपहर में पानी में अजीब सी दुर्गंध आ रही थी। उन्होंने स्टाफ नर्सों से इसकी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शाम को मामला तब तूल पकड़ गया जब दुर्गंध बढ़ने लगी और वार्ड में तैनात कर्मचारियों ने इस बारे में सीएमएस डॉ. एच.के. मिश्रा को जानकारी दी। सीएमएस के निर्देश पर कुछ कर्मचारियों को पानी टंकी की जांच के लिए भेजा गया।
जब कर्मचारी पांचवीं मंजिल पर स्थित करीब 10 फुट ऊंची टंकी पर चढ़े तो उनके होश उड़ गए। टंकी में एक युवक का शव तैरता हुआ दिखाई दिया। यह सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन, पुलिस और फायर ब्रिगेड टीम को सूचना दी गई। कुछ ही देर में सीओ सिटी, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, सीएमएस और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए।
टंकी की ऊंचाई अधिक होने और जगह सीमित होने के कारण शव को बाहर निकालना बेहद कठिन था। पुलिस ने प्रारंभिक रूप से शव को निकालने की कोशिश की, लेकिन असफल रही। इसके बाद फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया गया। शाम छह बजे पहुंची टीम ने लोहे के कांटे और रस्सियों की मदद से करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद रात 9:30 बजे शव को बाहर निकाला।
शव बरामद होते ही पूरे मेडिकल कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया। वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में डर का माहौल था। सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कई वार्डों में इसी टंकी से पानी की आपूर्ति की जाती है, जिससे मरीजों के बीच संक्रमण फैलने का खतरा भी उत्पन्न हो गया। तत्काल प्रभाव से अस्पताल प्रशासन ने पानी की आपूर्ति रोक दी और मरीजों को उस पानी का उपयोग न करने का निर्देश दिया।
मरीजों की परेशानी और बढ़ गई जब देर रात तक अस्पताल प्रशासन पीने के पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सका। परिणामस्वरूप मरीजों और परिजनों को खुद बोतलबंद पानी खरीदकर पीना पड़ा। इस बीच प्रशासनिक अधिकारी देर रात तक मौके पर डटे रहे।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी बिल्डिंग में रोजाना करीब 1,500 से अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं। इसी बिल्डिंग में ओटी (ऑपरेशन थिएटर), मेडिसिन, सर्जिकल और आर्थोपेडिक वार्ड भी संचालित हैं। सोमवार को सौ से अधिक मरीज इन वार्डों में भर्ती थे। घटना के बाद सभी वार्डों में मरीजों में दहशत का माहौल था। पुलिस अब इस रहस्यमयी घटना की जांच में जुट गई है कि आखिर युवक का शव पानी की टंकी तक पहुंचा कैसे। प्रारंभिक जांच में पुलिस इस बात पर उलझी है कि यह मामला हत्या का है या आत्महत्या का। फिलहाल युवक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं किसी ने युवक की हत्या कर शव को छिपाने के उद्देश्य से टंकी में तो नहीं फेंका। घटना स्थल की स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बिना मदद के कोई भी व्यक्ति इतनी ऊंचाई पर बनी टंकी में खुद नहीं जा सकता। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मेडिकल कॉलेज की छत पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है। ऐसे में पुलिस के लिए यह पता लगाना चुनौतीपूर्ण होगा कि युवक वहां कैसे पहुंचा या किसी ने उसे वहां लाकर डाला।
घटना के बाद लोगों में आक्रोश भी देखने को मिला। मरीजों के परिजनों ने कहा कि यह मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही है। इतनी संवेदनशील जगह पर कोई बाहरी व्यक्ति कैसे पहुंच गया और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी — यह प्रशासन की बड़ी विफलता है।
फिलहाल पुलिस घटना की गहराई से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत कैसे हुई — हत्या, आत्महत्या या कोई अन्य कारण। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। देर रात तक मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक अधिकारी जांच में जुटे रहे।

इसे भी पढ़ें : छेड़खानी प्रकरण में जांच तेज: प्रधानाचार्य और प्रबंधक ने जांच अधिकारी को सौंपी 30-30 पेज की आख्या

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