द देवरिया न्यूज़,गाजा सिटी : गाजा पट्टी में 2023 के संघर्ष के दौरान ध्वस्त हुई एक रिहायशी इमारत के मलबे से 112 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। बरामदगी के बाद सभी मृतकों का सामूहिक अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, शव लगभग दो वर्षों से मलबे के नीचे दबे हुए थे और हाल ही में चले दो सप्ताह के विशेष अभियान के दौरान उन्हें बाहर निकाला गया।
स्थानीय मीडिया में सामने आए वीडियो में शवों को कतारबद्ध रखा गया था। प्रत्येक शव को फिलिस्तीनी झंडे से ढका गया था और कुछ पर मृतकों की तस्वीरें भी लगाई गई थीं। इसके बाद परिजनों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों में अबू शरिया और हसायना परिवारों के सदस्य शामिल हैं। इनमें लगभग 40 बच्चे, 38 महिलाएं और सात दिव्यांग व्यक्ति बताए गए हैं। जानकारी के अनुसार, 22 नवंबर 2023 को गाजा शहर के सबरा इलाके में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में इन लोगों की मौत हुई थी। यह घटना 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए इजरायल-हमास संघर्ष के शुरुआती चरण में हुई थी।
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा
हमास के नियंत्रण वाले गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि अक्टूबर 2023 से जारी संघर्ष में अब तक 73 हजार से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि मंत्रालय के आंकड़ों को वह व्यापक रूप से विश्वसनीय मानता है, हालांकि युद्ध की परिस्थितियों में स्वतंत्र सत्यापन हमेशा संभव नहीं होता।
रेड क्रॉस ने अभियान में किया सहयोग
मलबे से शव निकालने का अभियान गाजा की सिविल डिफेंस टीम ने चलाया। इस अभियान में इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) ने भी सहायता प्रदान की। ICRC के प्रवक्ता पैट्रिक ग्रिफिथ्स के अनुसार, संस्था ने बचाव दल को दस्ताने, सुरक्षा उपकरण, फावड़े और बॉडी बैग जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई। साथ ही सुरक्षित तरीके से शवों की बरामदगी और सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया। उन्होंने बताया कि गाजा में उपलब्ध दो खुदाई मशीनों (एक्सकेवेटर) की व्यवस्था भी ICRC ने की।
संघर्ष की मानवीय कीमत
गाजा में जारी युद्ध के बीच बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जाते हैं और कई स्थानों पर मलबे के नीचे शव दबे होने की आशंका बनी हुई है। राहत एजेंसियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में बचाव और पुनर्वास कार्य अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
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