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भारत का अपना स्पेस स्टेशन: इसरो ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के मूल ढांचे पर शुरू किया काम, 2028 में पहला मॉड्यूल लॉन्च होगा

Published on: January 25, 2026
India's own space station

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष में अपनी मजबूत मौजूदगी की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के मूल ढांचे के विकास पर काम शुरू कर दिया है। यह स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित किया जाएगा और इसके जरिए भारत को अंतरिक्ष में एक स्थायी ठिकाना मिल जाएगा। इसरो के लिए यह अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी मिशनों में से एक माना जा रहा है।

अब तक इसरो सीमित अवधि के मिशनों के जरिए अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति दर्ज कराता रहा है, लेकिन भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के बनने से भारतीय वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहकर शोध और प्रयोग कर सकेंगे।

2028 में लॉन्च होगा पहला मॉड्यूल

इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मूल ढांचे को विकसित करने के लिए भारतीय एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरर्स से औपचारिक संपर्क किया है। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह संपर्क एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) के जरिए किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 में लॉन्च किए जाने की योजना है। इसे किसी भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक को लंबे समय तक अंतरिक्ष में स्थित स्वदेशी प्रयोगशाला में रखने की दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है।

गगनयान के बाद शुरू होगी स्पेस स्टेशन यात्रा

इसरो की योजना के अनुसार, मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम ‘गगनयान’ के सफल होने के तुरंत बाद भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा को गति दी जाएगी। इसरो का मानना है कि यह स्टेशन भारत को दीर्घकालिक वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए एक अनोखा मंच देगा और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए जरूरी तकनीकों के विकास में भी मददगार साबित होगा।

2035 तक बनेगा पूर्ण विकसित स्पेस स्टेशन

इसरो की दीर्घकालिक योजना के तहत 2028 में पहले मॉड्यूल की लॉन्चिंग के बाद, 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को पूरी तरह विकसित कर लिया जाएगा। इसके अलग-अलग मॉड्यूल पृथ्वी से चरणबद्ध तरीके से भेजे जाएंगे और अंतरिक्ष में ही उन्हें जोड़कर पूरा ढांचा तैयार किया जाएगा। इस समय शुरू की गई प्रक्रिया BAS-01 मॉड्यूल के लिए है, जिसे पूरे मिशन की रीढ़ माना जा रहा है। भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों को इसके दो सेट तैयार करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

पूरी तरह स्वदेशी होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के प्रत्येक मॉड्यूल का व्यास 3.8 मीटर और ऊंचाई करीब 8 मीटर होगी। ये मॉड्यूल AA-2219 एल्यूमीनियम मिश्र धातु से बनाए जाएंगे, जिसका उपयोग पहले भी मानव अंतरिक्ष उड़ानों में किया जा चुका है। इसरो ने स्पष्ट किया है कि सभी मॉड्यूल ह्यूमैन-रेटेड होंगे, यानी सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। खास बात यह है कि यह पूरा प्रोजेक्ट पूरी तरह स्वदेशी होगा और किसी भी चरण में विदेशी भागीदारी नहीं ली जाएगी।

स्पेस स्टेशन बनाने वाले चुनिंदा देशों में होगा भारत

पहला मॉड्यूल लॉन्च होते ही भारत उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा, जो अंतरिक्ष की कक्षा में स्पेस स्टेशन बनाने, उसे लॉन्च करने और लंबे समय तक मेंटेन करने में सक्षम हैं। इस सूची में फिलहाल अमेरिका, रूस, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), जापान, कनाडा और चीन शामिल हैं। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन न सिर्फ इसरो की तकनीकी क्षमता का प्रमाण होगा, बल्कि यह भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान की वैश्विक दौड़ में एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला कदम भी साबित होगा।


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