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पंजाब में बाढ़ का कहर: पानी उतरा, तबाही के निशान गहरे छोड़ गया; फसलें बर्बाद, लोग बेघर

Published on: September 12, 2025
flood havoc in punjab
द देवरिया न्यूज़ , पंजाब : सतलुज और रावी दरिया में आई बाढ़ अब भले ही उतरने लगी हो, लेकिन उसकी तबाही के निशान और लोगों के जख्म धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। फसलें नष्ट, घर उजड़े, सड़कें टूटीं और पशु बीमार—प्रभावित क्षेत्रों के लोग अब जीवन को फिर से पटरी पर लाने की जद्दोजहद में लगे हैं।
हुसैनीवाला बॉर्डर: बाढ़ से तबाह हुए 17 गांव, धान की फसल बर्बाद
हुसैनीवाला बॉर्डर से सटे गांवों में बाढ़ ने विकराल रूप लिया। लगभग 17 गांवों में पानी अब उतर चुका है, लेकिन सड़कें टूट गई हैं, कई घर गिर गए हैं और लोग तिरपाल या टेंट में रहने को मजबूर हैं। घरों में दो से तीन फीट कीचड़ भर गया है, जो बीमारियों को न्योता दे रहा है।
सबसे अधिक प्रभावित गांवों में टेंडी वाला और कालू वाला शामिल हैं। इन दो गांवों की लगभग 150 एकड़ कृषि भूमि सतलुज नदी में समा चुकी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही नदी के किनारों की मरम्मत नहीं हुई, तो यह गांव पूरी तरह बह सकते हैं। टेंडी वाला की अतिरिक्त 20 एकड़ भूमि भी खतरे में है।
अजनाला का चमियारी गांव: ऐतिहासिक विरासत अब अस्तित्व की लड़ाई में
अमृतसर जिले के सीमांत क्षेत्र अजनाला का ऐतिहासिक गांव चमियारी, जो कभी स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों के लिए जाना जाता था, आज अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है। रावी दरिया और मूसलाधार बारिश के कारण यहां की गलियां अब गाद से भरी पड़ी हैं, और संपर्क मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं।
गांववासी सतनाम सिंह कहते हैं, “हमारे घरों में दो हफ्ते तक ढाई-तीन फीट पानी भरा रहा। रात को नींद नहीं आती थी, डर था कि कहीं छत न गिर जाए।” गांव के कई कच्चे मकान ढह चुके हैं, और लोग पड़ोसियों या तिरपालों में शरण लिए हुए हैं।
खेती और पशुपालन पर सबसे बड़ा असर, जमीन हो रही बंजर
बाढ़ का सबसे गंभीर प्रभाव कृषि और पशुधन पर पड़ा है। गांव के किसान जसवंत सिंह बताते हैं, “धान की पूरी फसल गल चुकी है। खेतों में रेत और गाद की मोटी परत जम गई है।” उन्होंने चिंता जताई कि अगली फसल की बुआई महीनों दूर है, और लाखों रुपये खर्च करने होंगे सिर्फ खेतों को दोबारा उपजाऊ बनाने में।
पशुओं की स्थिति भी खराब है। दूषित पानी और चारे की कमी के चलते कई पशु बीमार पड़ चुके हैं, कुछ की मौत भी हो चुकी है। लोगों में भी बुखार, दस्त और त्वचा रोग फैलने लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि अब तक कोई मेडिकल टीम गांव में नहीं पहुंची है।
ग्रामीणों की मांग: त्वरित राहत और पुनर्वास की व्यवस्था हो
ग्रामीणों की मांग है कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा घोषित सहायता राशि बिना देरी और भ्रष्टाचार के सीधे पीड़ितों तक पहुंचे। इसके अलावा:
  • टूटे सड़क और गलियों की तत्काल मरम्मत की जाए
  • नष्ट हुई फसल का उचित मुआवजा दिया जाए
  • खेतों को दोबारा उपजाऊ बनाने के लिए विशेष सहायता पैकेज लागू किया जाए
  • इंसानों और पशुओं के लिए मेडिकल कैंप तुरंत लगाए जाएं
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ ने न केवल उनकी संपत्ति और आजीविका छीनी है, बल्कि उनके सपनों और भविष्य को भी असुरक्षित बना दिया है।

इसे भी पढ़े : देवरिया: हाईटेंशन तार से मौत के मामले में बड़ा फैसला, बिजली विभाग देगा 5 लाख का मुआवजा

 


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