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UNSC सुधारों में देरी पर भारत का कड़ा संदेश, कहा- कुछ देशों के स्वार्थ पूरी दुनिया की उम्मीदों को नहीं रोक सकते

Published on: July 30, 2026
On delay in UNSC reforms

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में लंबे समय से लंबित सुधारों को लेकर भारत ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा सुरक्षा परिषद सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (Intergovernmental Negotiations- IGN) को 81वें सत्र तक बढ़ाने के फैसले के बाद भारत ने स्पष्ट कहा कि कुछ सदस्य देशों के सीमित और विभाजनकारी हितों के कारण वैश्विक सुधार प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक बंधक नहीं बनाया जा सकता।

17 दौर की बातचीत के बाद भी नहीं निकला कोई ठोस परिणाम

UNSC सुधारों को लेकर अब तक 17 दौर की अंतर-सरकारी वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। इस प्रक्रिया की न तो कोई निश्चित समयसीमा तय है और न ही सुधारों को लागू करने की दिशा में कोई निर्णायक प्रगति हुई है। अब यह प्रक्रिया अपने 18वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है।

भारत ने जताई गहरी निराशा

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि 80वां IGN सत्र भी वास्तविक सुधारों की दिशा में कोई ठोस आधार तैयार करने में असफल रहा। उन्होंने कहा कि अधिकांश चर्चाएं केवल सदस्य देशों और विभिन्न समूहों के पहले से तय रुख को दोहराने तक सीमित रहीं, जिससे सुधार प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

भारतीय दर्शन का उदाहरण देकर साधा निशाना

पर्वतनेनी हरीश ने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे आत्मा को मुक्ति प्राप्त करने से पहले जन्म और मृत्यु के कई चक्रों से गुजरना पड़ता है, उसी तरह IGN भी 17 चक्र पूरे कर चुका है, लेकिन अब तक सुधारों की “मुक्ति” कहीं दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर दुनिया और कितने वर्षों तक इंतजार करेगी।

‘कुछ देश सुधारों में डाल रहे हैं बाधा’

भारत ने आरोप लगाया कि कुछ सदस्य देश जानबूझकर सार्थक सुधारों की प्रक्रिया में रुकावट पैदा कर रहे हैं। भारत के अनुसार, वैश्विक समुदाय और सदस्य देशों के बीच सुरक्षा परिषद में सुधार की व्यापक मांग होने के बावजूद प्रक्रिया लगातार ठहराव का शिकार बनी हुई है।

पाकिस्तान और इटली वाले समूह पर परोक्ष निशाना

भारत ने बिना सीधे नाम लिए ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ (Uniting for Consensus) समूह की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इस 13 देशों के समूह का नेतृत्व इटली करता है और पाकिस्तान भी इसका सदस्य है। यह समूह किसी भी मसौदे (टेक्स्ट) को तब तक स्वीकार करने से इनकार करता है जब तक सभी सदस्य पूरी तरह सहमत न हों। भारत का कहना है कि इसी रणनीति के कारण टेक्स्ट-आधारित वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही है और सुधार प्रक्रिया लगातार अटकी हुई है।

G4 देशों ने भी तेज करने की मांग

भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील के G4 समूह ने भी सुरक्षा परिषद सुधारों की प्रक्रिया को गति देने की मांग दोहराई। G4 की ओर से जापान के स्थायी प्रतिनिधि यामाजाकी काजुयुकी ने कहा कि अगले सत्र में एक समेकित (Consolidated) मसौदा तैयार किया जाना चाहिए, ताकि टेक्स्ट-आधारित बातचीत शुरू हो सके और सुधार प्रक्रिया वास्तविक दिशा में आगे बढ़े।

सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों जरूरी?

भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और व्यापक सुधारों की वकालत करता रहा है। भारत का तर्क है कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व नहीं करती। इसलिए परिषद को अधिक प्रतिनिधिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए व्यापक सुधार समय की आवश्यकता है।



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