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छत्तीसगढ़: पूर्व नक्सली की पुलिस मुखबिर होने के शक में हत्या, 103 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

Published on: October 3, 2025
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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में बुधवार (1 अक्टूबर 2025) को एक पूर्व नक्सली मारे गए। पुलिस के मुताबिक, 31 वर्षीय मदकम भीमा की हत्या माओवादियों ने धारदार हथियारों से हमला कर की। उन पर आरोप था कि वे पुलिस के मुखबिर के रूप में काम कर रहे थे।

घर से घसीटकर हत्या

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि मदकम भीमा, पुजारीकांकर गांव (थाना उसूर क्षेत्र) के रहने वाले थे। रात करीब 9 बजे माओवादी उनके घर पहुंचे, उन्हें पुलिस मुखबिर होने का आरोप लगाकर बाहर घसीट लाए और धारदार हथियारों से उनकी हत्या कर दी।

पुलिस ने बताया कि भीमा पहले माओवादी संगठन (CPI–Maoist) की मिलिशिया में शामिल थे। आंध्र-तेलंगाना सीमा पर वॉरंगल पुलिस ने उन्हें पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जहां उन्होंने लगभग डेढ़ से दो साल बिताए। जेल से छूटने के बाद वे गांव लौट आए थे और परिवार के साथ सामान्य जीवन बिता रहे थे। बताया जा रहा है कि पिछले तीन महीनों से वे लगातार गांव में ही रह रहे थे और नक्सलियों से कोई संबंध नहीं था।

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बढ़ता नागरिकों पर हमला

इस घटना के साथ ही साल 2025 में अब तक बस्तर संभाग में नक्सलियों द्वारा मारे गए नागरिकों की संख्या 38 हो गई है। इनमें से 18 नागरिक केवल बीजापुर जिले में मारे गए हैं।

103 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

इसी बीच, बीजापुर में ही गुरुवार को 103 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से 49 नक्सलियों पर कुल ₹1.06 करोड़ का इनाम घोषित था।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में अब तक बस्तर रेंज में कुल 970 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। उन्होंने कहा—
“पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जागरण अभियान केवल आत्मसमर्पण भर नहीं है, बल्कि उस विचारधारा की हार है, जो वर्षों तक हिंसा और भ्रम पर आधारित रही।”

प्रशासन की चुनौती

यह घटना बताती है कि एक ओर जहां नक्सली हिंसा से आम नागरिकों में भय फैला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि माओवादी संगठन कमजोर पड़ रहे हैं। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए और निर्दोष ग्रामीणों की सुरक्षा की गारंटी दी जा सके।

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