ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि डॉ. अश्वनी पाण्डेय वर्तमान में प्राइवेट हॉस्पिटल पंजीयन के नोडल अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, जबकि शासन स्तर से 7 अप्रैल 2026 को उन्हें इस पद से हटाने का आदेश जारी किया जा चुका है। दावा किया गया कि यह आदेश सीएमओ कार्यालय, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं और गोरखपुर मंडल आयुक्त तक पहुंच चुका है, इसके बावजूद उन्हें अभी तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि सीएमओ देवरिया की कथित मिलीभगत से फर्जी तरीके से निजी अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी सेंटरों के पंजीकरण किए जा रहे हैं। आरोप है कि कई ऐसे अस्पताल, जिन पर पहले कार्रवाई हो चुकी थी, उन्हें दोबारा संचालित कराया जा रहा है।
ज्ञापन में ओम साई हॉस्पिटल, श्री साई हॉस्पिटल, जलपा हॉस्पिटल, यूनिवर्सल हॉस्पिटल, अंबे हॉस्पिटल, गौरव हॉस्पिटल और अंश हॉस्पिटल सहित कई संस्थानों के नाम का उल्लेख किया गया है। इन पर बिना मानकों के संचालन, अप्रशिक्षित डॉक्टरों से इलाज और कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सर्जरी कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
दिग्विजय चौबे ने यह भी कहा कि निरीक्षण से पहले संबंधित अस्पताल संचालकों को सूचना दे दी जाती है, जिससे जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है और संस्थानों को क्लीन चिट मिल जाती है। उन्होंने डॉ. अश्वनी पाण्डेय पर अपने नाम से भी निजी अस्पताल संचालित करने का आरोप लगाया।
चौबे ने दावा किया कि इन मामलों को उजागर करने के कारण उन पर दो बार हमला कराया गया। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे कड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।