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शैडो फ्लीट का काला खेल: प्रतिबंधों के बीच कैसे रूस-ईरान का तेल भारत और चीन तक पहुंच रहा है

Published on: January 25, 2026
dark game of shadow fleet

द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के बाद वैश्विक तेल व्यापार में एक बार फिर शैडो फ्लीट (डार्क फ्लीट) चर्चा के केंद्र में आ गई है। हालांकि हाल के महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद कम की है, फिर भी रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बना हुआ है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच रूस, ईरान और वेनेजुएला प्रतिबंधित तेल के कारोबार के लिए शैडो फ्लीट का सहारा ले रहे हैं।

शैडो फ्लीट दरअसल टैंकरों का एक ऐसा नेटवर्क है, जिसका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचते हुए कच्चे तेल की ढुलाई के लिए किया जाता है। अनुमान के मुताबिक, यह बेड़ा वैश्विक टैंकर क्षमता का करीब 18.5% हिस्सा है, जो इसके विशाल आकार और प्रभाव को दर्शाता है।

रूस बना शैडो फ्लीट का सबसे बड़ा खिलाड़ी

तेल के इस ‘काले खेल’ में रूस सबसे बड़ा खिलाड़ी है। शैडो फ्लीट में अक्सर पुराने जहाजों का उपयोग किया जाता है, जिनमें से कई पश्चिमी कंपनियों के स्वामित्व में होते हैं। प्रतिबंधों से बचने के लिए ये जहाज फर्जी झंडे लगाने, लोकेशन छिपाने, बार-बार नाम बदलने और GPS ट्रांसपोंडर बंद रखने जैसे अवैध तरीकों का सहारा लेते हैं। इन जहाजों का स्वामित्व ढांचा इतना जटिल होता है कि असली मालिक और बीमा कंपनियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ऐसे जहाजों की संख्या में तेजी आई है। ये टैंकर रूस के बाल्टिक और ब्लैक सी बंदरगाहों से तेल लेकर दुनियाभर में सप्लाई करते हैं, जिससे रूस को हर साल अरबों डॉलर की आमदनी होती है।

कितना बड़ा है शैडो फ्लीट?

कमोडिटी ट्रैकिंग फर्म Kpler के अनुसार, दुनिया में शैडो फ्लीट से जुड़े 3,300 से अधिक जहाज सक्रिय हैं। हाल के दिनों में सिंगापुर और मलेशिया के तटों के पास इन जहाजों की गतिविधियां बढ़ी हैं। ये अक्सर रात के समय जहाज-से-जहाज तेल ट्रांसफर करते हैं, जिससे सुरक्षा और पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा होता है।

जानकारों के मुताबिक, इन जहाजों का संचालन दुबई जैसे देशों से जुड़ी शेल कंपनियों के जरिए किया जाता है। कई बार समुद्र में तेल मिलाया जाता है, ताकि यह पता लगाना मुश्किल हो जाए कि क्रूड कहां से आया है और उसका असली स्रोत क्या है।

खरीदार कौन, विक्रेता कौन?

रूस और ईरान प्रतिबंधित कच्चे तेल के सबसे बड़े विक्रेता हैं, जबकि भारत और चीन इसके प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। Kpler के अनुसार, 2025 की आखिरी तिमाही में भारत और चीन ने शैडो फ्लीट के जरिए करीब 20% कच्चा तेल खरीदा।
S&P की रिपोर्ट बताती है कि चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के तटीय इलाकों में जहाज-से-जहाज ट्रांसफर के बाद चीनी बंदरगाहों तक पहुंचता है।

97 जहाजों से 3,300 तक का सफर

शैडो फ्लीट 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद चर्चा में आया। Kpler के मुताबिक, 2022 में इस बेड़े में सिर्फ 97 जहाज थे, जो 2025 के अंत तक बढ़कर 3,313 जहाज हो गए।
पिछले साल इस बेड़े ने करीब 100 अरब डॉलर का कच्चा तेल ट्रांसपोर्ट किया, जो वैश्विक तेल प्रवाह का 6–7% है। पश्चिमी देशों का आरोप है कि रूस इन जहाजों का इस्तेमाल जासूसी गतिविधियों के लिए भी कर रहा है।

भारत की भूमिका और आयात में गिरावट

भारत भी शैडो फ्लीट के जरिए क्रूड आयात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। अनुमान है कि 2024 में रूस से भारत आने वाले 9.5% कच्चे तेल की सप्लाई शैडो फ्लीट के माध्यम से हुई।
हालांकि अप्रैल में अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल का आयात घटाया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जुलाई 2024 में 45% से घटकर दिसंबर 2025 में 32% रह गई है।

कुल मिलाकर, कड़े प्रतिबंधों और कार्रवाई के बावजूद शैडो फ्लीट न सिर्फ कायम है, बल्कि लगातार फैल रहा है। यह वैश्विक तेल बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है, जिसे रोक पाना फिलहाल आसान नहीं दिख रहा।


इसे भी पढ़ें : देवरिया : कच्ची शराब के कारोबार पर छापा, ईंट भट्ठा मालिक समेत तीन पर केस, दो गिरफ्तार


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