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भारत के स्वदेशी टैंक मिशन को रूस का बड़ा ऑफर, T-90MS के संयुक्त उत्पादन का दिया प्रस्ताव

Published on: August 2, 2026
India's Indigenous Tank Missions

द  देवरिया न्यूज़,मॉस्को/नई दिल्ली : भारत अपनी सैन्य ताकत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ‘फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल’ (FRCV) और ‘फ्यूचर मेन बैटल टैंक’ (FMBT) कार्यक्रमों के तहत देश स्वदेशी बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों और आधुनिक टैंकों के विकास पर तेजी से काम कर रहा है। इसी बीच भारत के लंबे समय से रक्षा साझेदार रहे रूस ने नई दिल्ली को अत्याधुनिक T-90MS मेन बैटल टैंक के संयुक्त उत्पादन (Joint Production) का प्रस्ताव दिया है।

रूस की सरकारी रक्षा निर्यात कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (Rosoboronexport) का कहना है कि यह प्रस्ताव भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल हथियारों की बिक्री नहीं, बल्कि तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) और स्थानीय उत्पादन के जरिए रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देना है।

T-90MS टैंक में क्या है खास?

T-90MS, रूस के T-90 टैंक परिवार का सबसे आधुनिक संस्करण माना जाता है। इसमें रूसी सेना के T-90M मॉडल में इस्तेमाल की गई कई उन्नत तकनीकों को शामिल किया गया है। इस टैंक में 1,130 हॉर्सपावर का शक्तिशाली इंजन, नया डिजाइन वाला टर्रेट (Turret), बेहतर आर्मर सुरक्षा, अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम, आधुनिक थर्मल इमेजिंग, डिजिटल बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम और कई उन्नत इलेक्ट्रॉनिक क्षमताएं मौजूद हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य युद्ध के दौरान टैंक की मारक क्षमता, सुरक्षा और संचालन दक्षता को बढ़ाना है।

भारत-रूस रक्षा सहयोग को मिल सकती है नई मजबूती

भारत और रूस के बीच दशकों से रक्षा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है। भारतीय सेना के बख्तरबंद बेड़े में आज भी रूसी मूल के T-72 ‘अजेय’ और T-90S ‘भीष्म’ टैंक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। पिछले करीब 25 वर्षों से भारत में लाइसेंस के तहत T-90 टैंकों का उत्पादन किया जा रहा है। रूस का मानना है कि इसी अनुभव के आधार पर अब T-90MS का संयुक्त उत्पादन दोनों देशों के रक्षा सहयोग को और मजबूत बना सकता है।

आत्मनिर्भर भारत की रणनीति के अनुरूप प्रस्ताव

रूस ने स्पष्ट किया है कि वह केवल तैयार टैंक बेचने के बजाय भारत में उत्पादन और तकनीकी सहयोग का मॉडल अपनाना चाहता है। इससे भारत को आधुनिक सैन्य तकनीक हासिल करने के साथ-साथ घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी FRCV और FMBT परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में रूस खुद को भारत के तकनीकी साझेदार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

अनुभवी प्लेटफॉर्म पर रूस का भरोसा

रूसी रक्षा उद्योग का दावा है कि T-90 श्रृंखला के टैंक दुनिया के कई इलाकों में लंबे समय से संचालन में हैं और युद्ध परिस्थितियों में उनकी क्षमता साबित हो चुकी है। कंपनी का कहना है कि पहले से परीक्षण किए जा चुके प्लेटफॉर्म पर आधारित तकनीक अपनाने से नए विकास कार्यक्रमों की तुलना में तकनीकी जोखिम कम होता है और सेना में इन्हें तेजी से शामिल किया जा सकता है।

हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दावे रूस की विपणन रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं। फिर भी यह साफ है कि भारत के तेजी से बदलते रक्षा बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखने के लिए रूस अब तकनीकी साझेदारी और संयुक्त उत्पादन पर अधिक जोर दे रहा है।


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