द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यदि दान राशि में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों की पहचान और कानून के अनुसार सजा ही समाज का विश्वास दोबारा कायम कर सकती है। एक मीडिया इंटरव्यू में आलोक कुमार ने इस पूरे विवाद पर वीएचपी का पक्ष रखते हुए कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए।
‘दान में गड़बड़ी की खबर बेहद पीड़ादायक’
आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सदियों के संघर्ष और करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर के लगभग 12.5 करोड़ परिवारों ने स्वेच्छा से योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि यदि लोगों के मन में यह धारणा बनती है कि दान की राशि का दुरुपयोग हुआ है, तो यह अत्यंत दुखद और चिंताजनक स्थिति है। उनके अनुसार, इससे मंदिर ट्रस्ट की छवि को नुकसान पहुंचा है और इस पूरे मामले में नैतिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
‘दोषी कोई भी हो, कार्रवाई होनी चाहिए’
वीएचपी अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि कानून के सामने सभी समान हैं और यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह तय करना जांच एजेंसियों का काम है कि कौन दोषी है और कौन नहीं। इसलिए किसी व्यक्ति विशेष के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उन्होंने दोहराया कि दोषियों की पहचान, मुकदमा और न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा ही इस मामले का सही समाधान है।
‘विश्व हिंदू परिषद की भूमिका अलग है’
जब उनसे पूछा गया कि मंदिर ट्रस्ट में वीएचपी से जुड़े लोगों की मौजूदगी के कारण क्या संगठन भी जिम्मेदार माना जाएगा, तो आलोक कुमार ने कहा कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत या प्रशासनिक जिम्मेदारी को पूरे संगठन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद ही विश्व हिंदू परिषद ने स्पष्ट कर दिया था कि मंदिर निर्माण से जुड़ी उसकी ऐतिहासिक भूमिका पूरी हो चुकी है और अब ट्रस्ट स्वतंत्र रूप से अपने दायित्व निभा रहा है।
पद छोड़ने के फैसले का किया समर्थन
मामले में नाम आने के बाद कुछ पदाधिकारियों द्वारा अपने पदों से हटने के फैसले पर आलोक कुमार ने कहा कि यदि जांच को निष्पक्ष बनाए रखने और किसी प्रकार के प्रभाव की आशंका दूर करने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने देना चाहिए और अंतिम निर्णय अदालत पर छोड़ देना चाहिए।
विपक्ष के आरोपों पर भी दिया जवाब
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी द्वारा मामले की जांच को लेकर उठाए गए सवालों पर वीएचपी अध्यक्ष ने कहा कि यदि किसी के पास ठोस तथ्य हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और कई लोगों के नाम सामने आए हैं। ऐसे में व्यापक और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना सबूत किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है।
अयोध्या और राम मंदिर को लेकर विपक्ष पर निशाना
आलोक कुमार ने विपक्षी दलों की राजनीतिक मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या और भगवान श्रीराम के मुद्दे पर अब राजनीतिक बयान दिए जा रहे हैं, जबकि पहले इन विषयों पर वही सक्रियता दिखाई नहीं देती थी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इस विषय को राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
जांच पूरी होने का इंतजार
राम मंदिर चंदा मामले की जांच फिलहाल संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। मामले में दर्ज एफआईआर और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। इस बीच वीएचपी ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास पूरी तरह बहाल हो सके।
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