इस घटनाक्रम को भारत और नेपाल के बीच हालिया तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। खासतौर पर लिपुलेख मार्ग से शुरू की गई कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़े हैं। नेपाल इस क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है और उसने भारत द्वारा इस मार्ग के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विक्रम मिस्री की यात्रा नई दिल्ली की ओर से नेपाल की नई सरकार के साथ संबंध मजबूत करने और उच्चस्तरीय वार्ताओं की तैयारी के रूप में देखी जा रही थी। इस दौरान प्रधानमंत्री बालेन शाह की संभावित भारत यात्रा पर भी चर्चा होनी थी।
CNN-News18 की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के कुछ सूत्रों ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विक्रम मिस्री से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह दौरा प्रभावित हुआ। हालांकि आधिकारिक तौर पर यात्रा स्थगित करने की वजह भारतीय पक्ष की व्यस्तता बताई गई है।
बताया जा रहा है कि विक्रम मिस्री की यात्रा की योजना मॉरीशस में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हुई बातचीत के दौरान बनी थी। इस दौरे के जरिए दोनों देशों के बीच नए राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी।
राजनयिक सूत्रों का कहना है कि इस घटनाक्रम के बावजूद भारत-नेपाल संबंधों में किसी बड़े संकट की संभावना नहीं है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, जल संसाधन, कनेक्टिविटी और सीमा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर कई द्विपक्षीय तंत्र पहले से मौजूद हैं और उन्हें फिर से सक्रिय करने की दिशा में काम जारी है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के करीबी सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा समय में नेपाल की सरकार “चुनिंदा जुड़ाव” की नीति अपना रही है। इसके तहत वह भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकों को सीमित रख रही है।
वहीं भारत सरकार के सूत्रों ने कहा है कि नई दिल्ली नेपाल के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत नेपाल में अपनी सहायता से चल रही परियोजनाओं की लगातार समीक्षा कर रहा है और ऐसे नए क्षेत्रों की तलाश कर रहा है, जो नेपाल सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप हों।
सूत्रों के अनुसार, दोनों देश व्यापार, सीमा प्रबंधन, जल बंटवारे और सुरक्षा सहयोग जैसे लंबित मुद्दों पर संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि आपसी संबंधों को नई गति दी जा सके।