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बिहार चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बीएसएलएसए को मतदाताओं की मदद का निर्देश

Published on: October 10, 2025
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द देवरिया न्यूज़  ,नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। अदालत ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) को निर्देश दिया कि वह जिला स्तर पर उन मतदाताओं की सहायता करे जिनके नाम अंतिम सूची से हटा दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश — मतदाताओं को मिले अपील का पूरा अवसर
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि प्रत्येक मतदाता को अपील करने का उचित अवसर मिलना चाहिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि अपील पर दिए गए आदेश “एक पंक्ति का संक्षिप्त जवाब” नहीं होना चाहिए, बल्कि यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि संबंधित व्यक्ति का नाम क्यों हटाया गया। अदालत ने बीएसएलएसए से कहा कि वह अर्ध-विधिक स्वयंसेवकों की एक सूची तैयार करे, ताकि वे अपील प्रक्रिया में मतदाताओं की मदद कर सकें और उन्हें संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करा सकें।
समय सीमा पर विचार अगली सुनवाई में

याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि जिन मतदाताओं के नाम एसआईआर के दौरान हटाए गए हैं, उनकी अपीलें एक तय समय सीमा के भीतर निपटाई जाएं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय सीमा तय करने के मुद्दे पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।

चुनाव आयोग और एनजीओ में टकराव
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता एनजीओ द्वारा दायर किए गए कुछ विवरण गलत हैं। आयोग के अनुसार, जिस व्यक्ति का नाम सूची से हटाए जाने का दावा किया गया है, वह जानकारी गलत है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि विवरण झूठे हैं, तो यह गंभीर मामला है।
वहीं, एनजीओ की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि विवादित मतदाता के विवरण की पुष्टि बीएसएलएसए की मदद से की जा सकती है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

कांग्रेस ने भी उठाए सवाल

इस मसले पर कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने आरोप लगाया कि एसआईआर के बाद भी मतदाता सूची में डुप्लीकेट एंट्री बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि लाखों डुप्लीकेट मतदाता मौजूद हैं और आयोग को पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
चुनाव आयोग का दावा — प्रक्रिया सफल रही
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में प्रेस वार्ता में दावा किया था कि बिहार में मतदाता सूची का पुनरीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। उन्होंने बताया कि अब राज्य में 7.23 करोड़ मतदाता सूची में शामिल हैं। बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा — पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा 11 नवंबर को। नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
विवाद बरकरार — मतदाता सूची पर कई सवाल

हालांकि, कई संगठनों और नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में अभी भी खामियां हैं। उनका दावा है कि बिहार की जनसंख्या और वयस्क आबादी की तुलना में सूची में दर्ज मतदाताओं की संख्या कम है। योगेंद्र यादव जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि एसआईआर के बावजूद डुप्लीकेट नाम और घुसपैठियों के मुद्दे अब भी हल नहीं हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई में समय सीमा तय करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विचार करेगा, जिससे बिहार चुनाव से पहले मतदाता सूची विवाद का समाधान हो सके।

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