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बिहार की सत्ता में भाजपा-नीतीश समीकरण पर नई चर्चा, पुराने अविश्वास की परछाई फिर चर्चा में

Published on: April 9, 2026
BJP-Nitish in power in Bihar
द  देवरिया न्यूज़,पटना : बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के रिश्तों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के साथ सत्ता साझेदारी के बावजूद नीतीश कुमार का राजनीतिक अनुभव और पुराने घटनाक्रम इस गठबंधन को लगातार संवेदनशील बनाए हुए हैं। ऐसे में भविष्य की राजनीति को लेकर अटकलें तेज हैं कि यदि दोनों दलों के बीच भरोसे का संकट फिर गहराया, तो बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट ले सकती है।

जेपी आंदोलन के प्रमुख नेता और नीतीश कुमार के करीबी रहे सरयू राय ने पहले दावा किया था कि 2022 में भाजपा के साथ गठबंधन टूटने के पीछे केवल राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि गंभीर अविश्वास भी कारण था। उनके अनुसार, नीतीश कुमार भाजपा के कुछ मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से नाराज थे और उन्हें यह भी जानकारी मिली थी कि भाजपा के कुछ नेताओं ने बेंगलुरु में जमीन खरीदी है।

सरयू राय ने यह भी आरोप लगाया था कि भाजपा के कुछ मंत्रियों पर तबादलों में रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई, लेकिन उस समय यह मामला राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा में रहा।

इसके अलावा, सरयू राय के मुताबिक भाजपा द्वारा जदयू विधायकों को तोड़ने की कोशिश ने भी रिश्तों में कड़वाहट बढ़ाई थी। उन्होंने दावा किया था कि 2022 में आरसीपी सिंह के नेतृत्व में जदयू के कुछ विधायकों को गुवाहाटी बुलाने की योजना बनाई गई थी, ताकि पार्टी में टूट कराई जा सके। हालांकि, समय रहते नीतीश कुमार को इसकी जानकारी मिल गई और कथित योजना सफल नहीं हो सकी।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इन घटनाओं की स्मृति आज भी बिहार की राजनीति में प्रासंगिक है। यदि भविष्य में भाजपा-नीतीश संबंधों में फिर तनाव बढ़ता है, तो ये पुराने मुद्दे फिर से उभर सकते हैं।

उधर, विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को अपने लिए अवसर के रूप में देख रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का मानना है कि यदि भाजपा और जदयू के बीच दोबारा टकराव होता है, तो बिहार की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि नई सरकार के गठन के बाद वे उसके हर कदम पर नजर रखेंगे और किसी भी कमजोरी या विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका मुख्य लक्ष्य सरकार पर दबाव बनाए रखना और संभावित अस्थिरता की स्थिति में राजनीतिक लाभ उठाना होगा।

विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनना केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। हालांकि इस बदलाव के साथ गठबंधन की स्थिरता, विश्वास और नेतृत्व संतुलन जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और नीतीश कुमार का गठबंधन कितनी मजबूती से साथ चलता है और क्या बिहार की राजनीति फिर किसी नए मोड़ पर पहुंचती है।



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