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असम में होगा भारत-जापान शिखर सम्मेलन, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति

Published on: June 21, 2026
India-Japan summit to be held in Assam

द  देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली/गुवाहाटी। भारत और जापान के बीच होने वाला वार्षिक शिखर सम्मेलन इस बार कई मायनों में खास होने जा रहा है। परंपरा से हटकर इस बार सम्मेलन का आयोजन असम में प्रस्तावित है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची अगले महीने असम का दौरा कर सकती हैं, जहां भारत-जापान संबंधों को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

आमतौर पर नई दिल्ली या मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन पहली बार पूर्वोत्तर भारत के किसी राज्य में आयोजित किया जा रहा है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

असम को मिलेगा वैश्विक मंच

विशेषज्ञों का मानना है कि असम में सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय राज्य की बढ़ती आर्थिक क्षमता और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ संपर्क बढ़ाने की भारत की नीति का केंद्र रहा है। ऐसे में यह आयोजन असम को एक उभरते औद्योगिक, व्यापारिक और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकता है।

50 से अधिक जापानी कंपनियों की भागीदारी

रिपोर्टों के अनुसार, सम्मेलन में 50 से अधिक जापानी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। इनमें ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, बुनियादी ढांचा और विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। बताया जा रहा है कि जापान के प्रतिनिधिमंडल में सुजुकी मोटर, इटोचू कॉर्पोरेशन और टोयोटा त्सुशो जैसी प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। इन कंपनियों की मौजूदगी से निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

सेमीकंडक्टर और ऊर्जा क्षेत्र पर रहेगा फोकस

सम्मेलन के दौरान सेमीकंडक्टर निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल उद्योग, रणनीतिक तेल भंडारण और डिजिटल बुनियादी ढांचे से जुड़े कई समझौतों पर चर्चा और संभावित हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। असम को भारत के उभरते सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रों में शामिल किया जा रहा है। हाल के वर्षों में टाटा समूह, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अदानी समूह जैसे बड़े भारतीय उद्योग समूहों ने यहां निवेश की संभावनाओं पर काम शुरू किया है, जिससे विदेशी निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है।

पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर

भारत और जापान के बीच लंबे समय से पूर्वोत्तर भारत में सड़क, पुल, औद्योगिक गलियारों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग जारी है। इस शिखर सम्मेलन में भी क्षेत्रीय संपर्क (कनेक्टिविटी), औद्योगिक विकास और व्यापारिक नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर संपर्क व्यवस्था से पूर्वोत्तर भारत को बांग्लादेश, म्यांमार और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बाजारों से जोड़ने में मदद मिलेगी।

‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मिलेगी मजबूती

असम में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस नीति का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत को एशियाई देशों के साथ व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संपर्क का प्रमुख केंद्र बनाना है। यदि प्रस्तावित निवेश और सहयोग समझौते आगे बढ़ते हैं, तो इससे न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में रोजगार, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार को गति मिल सकती है।

क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर

विश्लेषकों के अनुसार, भारत-जापान शिखर सम्मेलन का असम में आयोजन पूर्वोत्तर भारत के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इससे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने, नई तकनीकों तक पहुंच बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने में मदद मिल सकती है।

अब सभी की नजरें इस सम्मेलन पर टिकी हैं, जहां दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की उम्मीद है।



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