द देवरिया न्यूज़,बीजिंग : भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य टकराव के बाद चीन की ओर से पाकिस्तानी J-10CE लड़ाकू विमान, PL-15 मिसाइल और KLJ-7A AESA रडार की क्षमता को लेकर लगातार दावे किए जाते रहे हैं। अब चीनी सरकारी मीडिया ने एक नई रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तानी J-10CE विमानों ने बिना किसी बाहरी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) की मदद के अपने ऑनबोर्ड KLJ-7A AESA रडार के जरिए भारतीय लड़ाकू विमानों का पता लगाया और उन्हें निशाना बनाया।
चीनी सरकारी मीडिया Sohu ने देश के रडार विशेषज्ञ बेन डे के हवाले से यह दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 के दौरान पाकिस्तानी J-10CE विमानों ने करीब 200 किलोमीटर की दूरी से भारतीय विमानों को डिटेक्ट और ट्रैक करने के लिए KLJ-7A रडार का इस्तेमाल किया था।
हालांकि, इन दावों को लेकर स्वतंत्र रूप से पुष्टि उपलब्ध नहीं है। रक्षा विशेषज्ञों के बीच भी आधुनिक लड़ाकू विमानों, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की वास्तविक क्षमताओं को लेकर अलग-अलग राय है।
KLJ-7A रडार को लेकर चीन का क्या दावा है?
चीनी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि KLJ-7A AESA रडार में गैलियम नाइट्राइड (GaN) मॉड्यूल और लो-प्रोबेबिलिटी-ऑफ-इंटरसेप्ट यानी LPI वेवफॉर्म का इस्तेमाल किया गया है। चीन का कहना है कि इन तकनीकों की वजह से रडार दुश्मन के विमान को लंबी दूरी से ट्रैक कर सकता है और उसे रडार की मौजूदगी का पता चलने की संभावना कम रहती है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि J-10CE अपने रडार की मदद से करीब 200 किलोमीटर की दूरी से आधुनिक लड़ाकू विमानों को ट्रैक कर सकता है और PL-15 जैसी लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचा सकता है।
हालांकि, किसी भी लड़ाकू विमान की वास्तविक युद्ध क्षमता केवल उसके रडार या मिसाइल पर निर्भर नहीं करती। इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, रडार वॉर्निंग सिस्टम, डेटा लिंक, पायलट प्रशिक्षण, AWACS और पूरे नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
राफेल के SPECTRA सिस्टम को लेकर सवाल
चीनी दावों की चर्चा के बीच फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमान के SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम का भी जिक्र किया जा रहा है। SPECTRA को राफेल की प्रमुख सुरक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है। यह दुश्मन के रडार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक खतरों की पहचान करने तथा उनसे निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।
इसी वजह से कुछ रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी रडार के लिए राफेल जैसे विमान को बिना किसी चेतावनी के लंबी दूरी से ट्रैक करना और उस पर सफलतापूर्वक हमला करना केवल रडार की क्षमता से तय नहीं किया जा सकता।
हालांकि, किसी वास्तविक सैन्य टकराव में इस्तेमाल किए गए सिस्टम की पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती। इसलिए KLJ-7A और SPECTRA के बीच वास्तविक मुकाबले को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना भी मुश्किल है।
चीन के दावों में बदलाव को लेकर चर्चा
मई 2025 के सैन्य टकराव के बाद चीनी मीडिया में पाकिस्तान की कथित सैन्य सफलता को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे। उस समय कई रिपोर्टों में कहा गया था कि पाकिस्तान के J-10CE लड़ाकू विमान, PL-15 मिसाइल और ZDK-03 AEW&C विमान ने मिलकर एक नेटवर्क आधारित ‘किल चेन’ तैयार की थी।
अब चीनी मीडिया की नई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि J-10CE ने बिना AWACS की सहायता के अपने KLJ-7A रडार के जरिए ही भारतीय विमानों को ट्रैक किया और उन्हें निशाना बनाया।
दावों में इस बदलाव को लेकर रक्षा विश्लेषकों के बीच चर्चा है। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि चीन की नई रिपोर्ट वास्तव में किसी रणनीति में बदलाव का संकेत है या फिर यह उसके रक्षा उपकरणों के प्रचार का हिस्सा है।
J-10CE और PL-15 को वैश्विक बाजार में बेचने की कोशिश
चीन लंबे समय से अपने J-10CE लड़ाकू विमान और PL-15 मिसाइल को अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में बढ़ावा दे रहा है। पाकिस्तान द्वारा J-10CE के इस्तेमाल को चीन अपने रक्षा उत्पादों की क्षमता के प्रदर्शन के तौर पर पेश करता रहा है।
चीनी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों में अक्सर इन हथियार प्रणालियों की क्षमताओं को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं। दूसरी ओर, पश्चिमी देशों के रक्षा विशेषज्ञ इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन नहीं होने के कारण सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लड़ाकू विमान की क्षमता का आकलन केवल प्रचार सामग्री या मीडिया रिपोर्टों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्वतंत्र परीक्षण, वास्तविक युद्ध परिस्थितियों के आंकड़े और विश्वसनीय तकनीकी जानकारी जरूरी होती है।
क्या J-10CE राफेल से बेहतर है?
J-10CE और राफेल दोनों अलग-अलग देशों की तकनीक पर आधारित आधुनिक लड़ाकू विमान हैं। दोनों की क्षमताएं उनके रडार, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, सेंसर और नेटवर्किंग सहित कई कारकों पर निर्भर करती हैं।
इसलिए केवल यह दावा करना कि कोई एक विमान 200 किलोमीटर दूर से दूसरे विमान को आसानी से मार गिरा सकता है, वास्तविक युद्ध परिस्थितियों की पूरी तस्वीर नहीं बताता। किसी भी हवाई संघर्ष का परिणाम कई तकनीकी और रणनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
फिलहाल, चीन की ओर से KLJ-7A रडार और J-10CE की क्षमताओं को लेकर किए गए नए दावे चर्चा में हैं। लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने के कारण इन्हें चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट और दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
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