द देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में आई खटास के बीच अब बातचीत बहाल करने की मांग भी उठने लगी है। पिछले महीने भारत और पाकिस्तान के 117 एक्टिविस्ट और पूर्व अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खुला पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच संवाद शुरू करने की अपील की थी।
हालांकि, पाकिस्तान के एक विशेषज्ञ ने इस पहल के सफल होने पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और पाकिस्तान के पूर्व राजदूत तौकीर हुसैन ने डॉन में लिखे एक लेख में भारत-पाकिस्तान संबंधों की मौजूदा स्थिति के लिए मुख्य रूप से भारत की नीति को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार का पाकिस्तान के प्रति रवैया पहले की तुलना में अधिक सख्त है और निकट भविष्य में इसमें बदलाव के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।
बातचीत से भी रिश्तों में बदलाव की उम्मीद कम
तौकीर हुसैन ने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू भी होती है तो जरूरी नहीं कि इससे रिश्तों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव आए। उनके मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों में स्थायी सुधार नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन समस्या केवल विवादित मुद्दों की जटिलता नहीं है। उनके अनुसार दोनों देशों की नीतिगत पसंद भी रिश्तों को प्रभावित करती है।
मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति पर सवाल
पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने कहा कि पाकिस्तान को लेकर भारत का सख्त रुख पूरी तरह नया नहीं है और इससे पहले भी भारतीय सरकारें सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाती रही हैं। हालांकि, उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इस नीति का प्रभाव और अधिक स्पष्ट हुआ है।
उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा को पाकिस्तान के साथ संबंधों के केंद्र में रखा है। 2016 के पठानकोट हमले के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास और बढ़ा। हुसैन के अनुसार, भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ बातचीत से दूरी बनाए रखना भी इस नीति का हिस्सा है।
सिंधु जल संधि को लेकर भी विवाद
तौकीर हुसैन ने सिंधु जल संधि (IWT) के मुद्दे को भी भारत-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ते तनाव का अहम कारण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पानी के मुद्दे का इस्तेमाल पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है।
उन्होंने भारत की ओर से सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, यदि बातचीत को सफल बनाना है तो दोनों पक्षों को अपनी नीतियों में कुछ बदलाव करने होंगे।
बातचीत बहाल करना आसान नहीं
भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू करने की अपील ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी गहरी है। आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, कश्मीर और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दे पहले से ही विवाद का कारण बने हुए हैं।
ऐसे में दोनों देशों के बीच संवाद की बहाली एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया हो सकती है। पाकिस्तानी विशेषज्ञ भले ही मौजूदा तनाव के लिए भारत की नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हों, लेकिन द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार के लिए दोनों पक्षों के बीच भरोसा कायम करना और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ठोस समाधान तलाशना जरूरी होगा।
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