द देवरिया न्यूज़,बेरूत। लेबनान और इजरायल के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच प्रस्तावित युद्धविराम समझौते पर नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला ने गुरुवार को इजरायल और लेबनान सरकार के बीच हुए नवीनतम युद्धविराम समझौते को खारिज कर दिया। संगठन ने साफ कहा कि जब तक इजरायली सेना पूरी तरह लेबनान से वापस नहीं जाती, तब तक किसी भी प्रकार के समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी बीच इजरायली हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एक संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक भी संघर्ष की चपेट में आकर मारा गया।
हिजबुल्ला प्रमुख नईम कासिम ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने लिखित संदेश में कहा कि दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्ला लड़ाकों को हटाने की शर्त संगठन के लिए स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इसे “आत्मसमर्पण और पराजय” करार देते हुए कहा कि यह इजरायल के उद्देश्यों को पूरा करने जैसा होगा। कासिम ने कहा कि संगठन की प्राथमिकता इजरायली आक्रामकता को समाप्त कराना, युद्धविराम लागू कराना और लेबनानी क्षेत्र से इजरायली सेना की वापसी सुनिश्चित करना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक इजरायल लेबनानी जमीन पर मौजूद रहेगा, तब तक “प्रतिरोध” जारी रहेगा। हिजबुल्ला का कहना है कि उसने किसी भी पक्ष से अपने हथियार छोड़ने या गतिविधियां समाप्त करने का कोई वादा नहीं किया है।
वहीं, संघर्ष के दौरान दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई जारी है। संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) और सर्बिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मरजायून क्षेत्र में एक मोर्टार गोला गिरने से सर्बिया का एक शांति सैनिक मारा गया और दो अन्य घायल हो गए। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गोला किस पक्ष की ओर से दागा गया था।
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, मारूब गांव में हुए एक ड्रोन हमले में मोटरसाइकिल सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। इसके अलावा पूर्वी लेबनान की बेका घाटी के सोहमोर गांव में हुए हवाई हमलों में तीन अन्य लोगों की जान चली गई। इजरायली सेना ने इन घटनाओं पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उसने दक्षिणी लेबनान के कुछ क्षेत्रों में लोगों को प्रवेश न करने की चेतावनी जारी की है।
संघर्ष के बीच लेबनानी नागरिकों में भी युद्धविराम को लेकर संदेह बना हुआ है। सैदा शहर की निवासी मयादा हिजाजी ने कहा कि युद्धविराम की घोषणाएं बार-बार होती हैं, लेकिन जमीनी हालात नहीं बदलते और लोग लगातार मारे जा रहे हैं। वहीं स्थानीय निवासी सलाह नस्साब ने कहा कि लोग बार-बार अपने घर लौटते हैं और फिर विस्थापित होने को मजबूर हो जाते हैं।
अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार किए गए इस समझौते को लेबनान सरकार समर्थन दे रही है, लेकिन हिजबुल्ला की असहमति ने इसके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इसे स्थायी शांति की दिशा में अंतिम अवसर बताया है, जबकि ईरान ने भी इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और व्यापक युद्धविराम की मांग दोहराई है। ऐसे में क्षेत्र में तनाव अभी कम होता नहीं दिख रहा है और मध्य पूर्व में शांति प्रयासों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
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