सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बजट 2026 में सरकार क्रिप्टो टैक्स व्यवस्था में कोई नरमी लाएगी या मौजूदा सख्त नियमों को बरकरार रखा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब उस दौर में पहुंच चुका है, जहां डिजिटल एसेट्स इकोसिस्टम को ज्यादा स्पष्ट और संतुलित नीति की जरूरत है।
टीडीएस और टैक्स ढांचे में बदलाव की उम्मीद
PNAM & Co LLP के पार्टनर सीए मोहित गुप्ता के अनुसार, बजट 2026 से सबसे बड़ी उम्मीद सेक्शन 194S के तहत लगने वाले 1% टीडीएस को लेकर है। उनका कहना है कि मौजूदा टीडीएस दर ने क्रिप्टो बाजार की लिक्विडिटी को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके चलते ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट आई है और कई निवेशक विदेशी प्लेटफॉर्म का रुख कर रहे हैं। ऐसे में टीडीएस दर घटाने या इसकी सीमा बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है।
नुकसान की सेट-ऑफ व्यवस्था पर सवाल
वर्तमान टैक्स नियमों के तहत क्रिप्टो ट्रांजैक्शन से होने वाले नुकसान को न तो किसी अन्य VDA से हुए मुनाफे से समायोजित किया जा सकता है और न ही भविष्य के वर्षों में आगे ले जाया जा सकता है। सीए (डॉ.) सुरेश सुरना के मुताबिक, इससे निवेशकों पर वास्तविक नुकसान के बावजूद पूरे मुनाफे पर टैक्स का बोझ पड़ता है, जो न्यायसंगत नहीं है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि VDA कैटेगरी के भीतर ही नुकसान को सेट-ऑफ करने और 4 से 8 साल तक उसे कैरी फॉरवर्ड करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
भारत में क्रिप्टो टैक्स कितना है?
इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 115BBH के तहत क्रिप्टोकरेंसी के ट्रांसफर पर 30 प्रतिशत की फ्लैट टैक्स दर लागू है, जिस पर सरचार्ज और सेस भी जुड़ता है। इसके अलावा, सेक्शन 194S के तहत एक वित्तीय वर्ष में 10,000 रुपये से अधिक के क्रिप्टो लेनदेन पर 1% टीडीएस काटा जाता है।
दुनिया के मुकाबले भारत के नियम सख्त
पॉलीगॉन लैब के ग्लोबल हेड ऑफ पेमेंट्स एंड RWAs ऐश्वर्य गुप्ता का कहना है कि भारत का क्रिप्टो टैक्स ढांचा दुनिया के सबसे सख्त सिस्टम्स में शामिल है। जहां भारत में 30% टैक्स लगता है, वहीं यूएई और सिंगापुर जैसे देशों में क्रिप्टो मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं है। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार बजट 2026 में निवेशकों को राहत देने की दिशा में कदम उठा सकती है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट 2026 भारत में क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य के लिए राहत लेकर आता है या फिर निवेशकों को मौजूदा टैक्स ढांचे के साथ ही आगे बढ़ना पड़ेगा।