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हिंद महासागर में मौजूदगी बढ़ाएगा पाकिस्तान, नौसेना प्रमुख के बयान से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता

Published on: April 25, 2026
Will increase presence in the Indian Ocean
द  देवरिया न्यूज़,इस्लामाबाद : पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ ने हिंद महासागर को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि आने वाले समय में पाकिस्तान अपनी नौसैनिक मौजूदगी इस क्षेत्र में बढ़ाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक व्यापार में हिंद महासागर की अहम भूमिका के कारण भविष्य के युद्धों की दिशा यहीं से तय होगी। उनके इस बयान को क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एडमिरल अशरफ ने चेतावनी दी कि हिंद महासागर में किसी भी प्रकार की रुकावट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा कीमतों पर गहरा असर डाल सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बनी हुई है।

यह टिप्पणी कराची में मैरीटाइम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (MCE) द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “उभरती प्रौद्योगिकियां और भविष्य का युद्ध” के समापन अवसर पर की गई। इस सम्मेलन में समुद्री विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और रक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य तथा आधुनिक युद्ध में तकनीक की भूमिका पर चर्चा की।

नौसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग, सैन्य बलों और शिक्षाविदों के बीच सहयोग को मजबूत करना जरूरी है, ताकि एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पाकिस्तान को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ निर्यात के अवसर भी मिल सकते हैं।

एडमिरल अशरफ ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक समय में नागरिक और सैन्य प्रौद्योगिकियों के बीच की सीमाएं तेजी से धुंधली हो रही हैं, जो अवसरों के साथ-साथ नई चुनौतियां भी पेश कर रही हैं। सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि तेजी से विकसित होती तकनीकें युद्ध के स्वरूप, सैन्य रणनीतियों और संचालन के तरीकों को किस तरह बदल रही हैं।

हिंद महासागर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही वैश्विक समुद्री व्यापार की रीढ़ रहा है। यह महासागर एशिया, अफ्रीका और खाड़ी देशों को जोड़ता है और आज भी दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार इसी मार्ग से होता है। वर्तमान में वैश्विक कंटेनर यातायात का आधे से अधिक और तेल व्यापार का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा हिंद महासागर से होकर गुजरता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में किसी भी देश की बढ़ती सैन्य गतिविधियां रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में पाकिस्तान के इस बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री संतुलन के संदर्भ में गंभीरता से देखा जा रहा है।


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