नेपाल एयरलाइंस की हालत पहले से ही खराब है और इन विमानों ने संकट को और गहरा कर दिया है। सरकारी एयरलाइन इन विमानों को न तो बेच पा रही है, न लीज पर दे पा रही है और न ही चीन को वापस कर सकती है। ऐसे में ये विमान ‘सफेद हाथी’ बन चुके हैं—जो सिर्फ खर्च बढ़ा रहे हैं, लेकिन कोई कमाई नहीं दे रहे।
जानकारी के मुताबिक, नेपाल एयरलाइंस पहले ही 50 अरब रुपये से ज्यादा के कर्ज में डूबी हुई है। इन चीनी विमानों को भी कर्ज लेकर खरीदा गया था, जिस पर ब्याज लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते एक साल में ही इन विमानों से जुड़े ब्याज के कारण देनदारी में 68 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हो चुकी है।
इतना ही नहीं, ये विमान भले ही उड़ान नहीं भर रहे हों, लेकिन इनके रखरखाव पर हर साल भारी खर्च हो रहा है। बीमा, पार्किंग, इंजन मेंटेनेंस और तकनीकी बदलावों पर एयरलाइन को सालाना करीब 20 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
नेपाल एयरलाइंस ने इन विमानों से छुटकारा पाने की कई कोशिशें कीं। सितंबर 2022 में इन्हें लीज पर देने के लिए नोटिस जारी किया गया, लेकिन एक भी खरीदार या इच्छुक कंपनी सामने नहीं आई। बेचने की कोशिश भी नाकाम रही। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन विमानों की मांग बेहद कम है।
इन विमानों की खरीद में चीन ने नेपाल को आंशिक अनुदान और सॉफ्ट लोन दिया था। कुल राशि में 18 करोड़ युआन अनुदान के रूप में और 22.8 करोड़ युआन कर्ज के तौर पर मिले थे। जब तक यह कर्ज पूरी तरह नहीं चुकाया जाता, तब तक इन विमानों का स्वामित्व नेपाल के वित्त मंत्रालय के पास ही है। नेपाल सरकार चीन को 1.5% ब्याज देती है, जबकि एयरलाइन से 1.75% वसूला जाता है।
समस्या की जड़ शुरुआत से ही रही। नेपाल एयरलाइंस के पास इन चीनी विमानों को उड़ाने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित पायलट नहीं थे। साथ ही, इनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से उपलब्ध नहीं होते और जब मिलते हैं तो बेहद महंगे होते हैं। नेपाल के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में भी ये विमान अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए।
इन सभी समस्याओं को देखते हुए 29 जून 2020 को नेपाल एयरलाइंस के निदेशक मंडल ने पूरे बेड़े को सेवा से हटाने का फैसला लिया। तब से ये विमान काठमांडू एयरपोर्ट पर खड़े-खड़े खराब हो रहे हैं।
अब नेपाल के नए नेतृत्व, खासकर प्रधानमंत्री बालेन शाह के सामने यह बड़ी चुनौती है कि इन बेकार पड़े विमानों से कैसे छुटकारा पाया जाए और एयरलाइन को आर्थिक संकट से बाहर निकाला जाए।