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सपा विधायक मोहम्मद फहीम का ओबीसी जाति प्रमाण पत्र फर्जी घोषित, जिला प्रशासन ने किया निरस्त

Published on: February 12, 2026
of SP MLA Mohammad Faheem
द देवरिया न्यूज़,मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की बिलारी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद फहीम का पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद निरस्त कर दिया गया है। जिलाधिकारी की अगुवाई में गठित जनपद स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने विस्तृत जांच और सुनवाई के बाद यह फैसला लिया। इसी के साथ विधायक के चाचा मोहम्मद उस्मान और उनकी दो बेटियों, फरहीन जहां और समरीन जहां, के जाति प्रमाण पत्र भी रद्द कर दिए गए हैं।
समिति की जांच में यह निष्कर्ष निकला कि विधायक और उनके परिजनों का खुद को झोझा जाति के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग में वर्गीकृत कराना सही नहीं है। यह मामला मुरादाबाद निवासी विश्वास यादव उर्फ लवली यादव की शिकायत पर सामने आया था। लवली यादव ने 19 जुलाई 2024 को सत्यापन समिति के समक्ष याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि विधायक मोहम्मद फहीम और उनके परिवार के सदस्यों ने फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाए हैं।
चार सदस्यीय समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों, पुश्तैनी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच की। जांच में सामने आया कि विधायक के दादा मोहम्मद इस्लाम लेखपाल थे और वे खुद को सामान्य वर्ग का बताते थे। समिति को यह भी पता चला कि बिलारी क्षेत्र में झोझा जाति के बजाय तुर्क जाति के लोग निवास करते हैं, जिन्हें सामान्य श्रेणी में माना जाता है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर समिति ने सभी संबंधित जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का आदेश दिया।
मुरादाबाद के जिलाधिकारी अनुज सिंह ने पुष्टि की कि सत्यापन समिति की रिपोर्ट के आधार पर विधायक मोहम्मद फहीम समेत चार लोगों के ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द कर दिए गए हैं। वहीं, विधायक फहीम ने कहा कि वह विधानसभा सत्र के कारण लखनऊ में हैं और लौटने के बाद जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले पर बात करेंगे।
इस बीच, विधायक के चाचा मोहम्मद उस्मान ने प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके पास 1911 से लेकर 2018 तक के पुश्तैनी दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें उनकी जाति झोझा दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति ने इन साक्ष्यों को नजरअंदाज किया और अब वे इस आदेश के खिलाफ मंडलीय अपीलीय फोरम में अपील करेंगे।
गौरतलब है कि मोहम्मद फहीम ने पहली बार वर्ष 2015 में जिला पंचायत चुनाव के दौरान ओबीसी प्रमाण पत्र का उपयोग किया था। इसके बाद 2020 के जिला पंचायत चुनाव में उनकी चचेरी बहन फरहीन जहां का नामांकन भी इसी आधार पर निरस्त हुआ था। इस मामले को लेकर पहले से ही राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा था, जो अब विधायक के जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने के साथ और गहरा गया है।

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