द देवरिया न्यूज़,तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए 14-सूत्रीय शांति समझौते को लेकर अमेरिकी थिंक टैंक “इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW)” ने गंभीर चिंता जताई है। संस्थान का कहना है कि प्रस्तावित समझौता युद्ध को समाप्त तो कर सकता है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप ईरान आर्थिक और रणनीतिक रूप से पहले से अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।
थिंक टैंक के अनुसार, समझौते के तहत मिलने वाली आर्थिक राहत का उपयोग ईरान अपने मिसाइल, ड्रोन और परमाणु कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने तथा क्षेत्र में अपने समर्थक समूहों के नेटवर्क को मजबूत करने में कर सकता है।
आर्थिक राहत पर जताई चिंता
ISW का कहना है कि समझौते में ईरान को व्यापक आर्थिक लाभ मिलने का प्रावधान है, जबकि ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम में ठोस और सत्यापित रियायतें देने के लिए तैयार है। संस्थान ने चेतावनी दी कि आर्थिक प्रतिबंधों में ढील से ईरान की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी, जिसका उपयोग सैन्य और रणनीतिक कार्यक्रमों में किया जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की शर्तों पर सवाल
थिंक टैंक ने समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी भाषा को “अस्पष्ट” बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जलमार्ग की स्वतंत्र आवाजाही से संबंधित समयसीमा और प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं। संस्थान का दावा है कि भविष्य में ईरान इस अस्पष्टता का लाभ उठाकर जहाजों की आवाजाही पर प्रभाव या नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर सकता है।
‘इस्लामाबाद एमओयू’ की प्रमुख बातें
अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते की प्रमुख शर्तें इस प्रकार बताई जा रही हैं—
सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त किए जाएंगे।
दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या बल प्रयोग की धमकी नहीं देंगे।
संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाएगा।
ईरान 30 दिनों के भीतर समुद्री बारूदी सुरंगें हटाएगा।
अमेरिका ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करेगा।
ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर तक का अंतरराष्ट्रीय फंड तैयार किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज ईरानी संपत्तियों को जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और अंतिम वार्ता तक अपने परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति बनाए रखेगा।
दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
हालांकि, थिंक टैंक की आशंकाएं उसके विश्लेषण पर आधारित हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान भविष्य में आर्थिक संसाधनों का उपयोग किस प्रकार करेगा। साथ ही, किसी भी परमाणु गतिविधि या समझौते के उल्लंघन संबंधी दावों की पुष्टि आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों और स्वतंत्र जांच के आधार पर ही की जा सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि समझौते की शर्तों का पालन दोनों पक्ष करते हैं, तो इससे क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है। वहीं आलोचकों का तर्क है कि प्रतिबंधों में ढील और वित्तीय राहत से ईरान की क्षेत्रीय भूमिका और प्रभाव बढ़ सकता है।
इसे भी पढ़ें : अमेरिका-ईरान शांति समझौते का कथित ड्राफ्ट आया सामने, प्रतिबंध हटाने से लेकर परमाणु कार्यक्रम तक कई बड़े प्रावधान
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