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वायु प्रदूषण पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश बोले— ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ कागजी बनकर रह गया

Published on: January 12, 2026
Congress attack on air pollution
द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि एनसीएपी अब ‘नेशनल’ नहीं, बल्कि ‘नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ यानी केवल कागजों तक सीमित योजना बनकर रह गया है।
रविवार को जारी बयान में जयराम रमेश ने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक ताजा विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट उस सच्चाई की पुष्टि करती है, जो लंबे समय से देश का “सबसे खुला रहस्य” रही है। उन्होंने कहा कि भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर संरचनात्मक संकट बन चुका है, जबकि सरकार की प्रतिक्रिया न केवल कमजोर बल्कि अपर्याप्त भी है।

जयराम रमेश के अनुसार, सैटेलाइट डेटा पर आधारित इस अध्ययन में सामने आया है कि देश के लगभग 44 प्रतिशत शहर लगातार गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। आकलन किए गए 4,041 शहरों में से 1,787 शहर ऐसे हैं, जहां बीते पांच वर्षों के दौरान हवा में PM2.5 का वार्षिक स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों से ऊपर बना रहा।
उन्होंने कहा कि जिस एनसीएपी को सरकार बड़े पैमाने पर प्रचारित कर रही है, वह जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित नहीं हो पाया है। ऐसे में इसकी गहन समीक्षा, व्यापक सुधार और पुनर्गठन की तत्काल जरूरत है।
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सबसे पहला कदम यह स्वीकार करना होना चाहिए कि देश के बड़े हिस्से में वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए एयर पॉल्यूशन (कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) एक्ट, 1981 और 2009 में लागू नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स की पूरी तरह से समीक्षा और सुधार किया जाना चाहिए।
सरकार से मांग करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि एनसीएपी के तहत मिलने वाले फंड में बड़ा इजाफा किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे 25 हजार करोड़ रुपये की योजना बनाया जाए और देश के सबसे अधिक प्रदूषित 1,000 शहरों व कस्बों तक इसका विस्तार किया जाए। साथ ही, एनसीएपी के प्रदर्शन का पैमाना PM2.5 स्तर को बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएपी को कानूनी आधार दिया जाए और इसका फोकस प्रमुख प्रदूषण स्रोतों पर होना चाहिए। कांग्रेस नेता ने मांग की कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिए तय वायु प्रदूषण मानकों को तुरंत लागू किया जाए और वर्ष 2026 के अंत तक सभी बिजली संयंत्रों में फ्लू गैस डी-सलफराइजर (FGD) अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की स्वतंत्रता बहाल करने और पिछले दस वर्षों में किए गए जन-विरोधी पर्यावरणीय संशोधनों को वापस लेने की भी मांग की गई।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने संसद में दो बार वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को कमतर दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि सरकार सच्चाई से अनजान नहीं है, बल्कि अपनी अक्षमता और लापरवाही को छिपाने का प्रयास कर रही है।

इसे भी पढ़ें : यूपी में पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी, 14 से 30 जनवरी तक चलेगा होम स्टे और B&B जागरूकता अभियान


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