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ढाका में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से बढ़ीं उम्मीदें, 25 जून को राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को सौंपेंगे परिचय पत्र

Published on: June 25, 2026
New High Commissioner of India in Dhaka

द  देवरिया न्यूज़,ढाका/नई दिल्ली : भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को नई दिशा देने की उम्मीदों के बीच भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी गुरुवार, 25 जून को बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को अपना परिचय पत्र (क्रेडेंशियल्स) सौंपेंगे। इसके साथ ही वह आधिकारिक रूप से ढाका में भारत के उच्चायुक्त के रूप में अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे।

इससे पहले शनिवार को दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रोटोकॉल प्रमुख एम. जाहिद उल इस्लाम को अपने परिचय पत्रों की प्रतियां सौंपीं और विदेश सचिव असद आलम सियाम से शिष्टाचार मुलाकात भी की। उनकी नियुक्ति को भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

गोपाल कृष्ण गांधी ने की नियुक्ति की सराहना

भारत के पूर्व राजनयिक और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी ने दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि ढाका में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उनसे बेहतर विकल्प शायद ही कोई हो सकता था।

उन्होंने लिखा कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से दिनेश त्रिवेदी को जानते हैं और उनके व्यक्तित्व, राजनीतिक अनुभव तथा बंगाली समाज की समझ को देखते हुए यह नियुक्ति बेहद उपयुक्त है।

गोपाल कृष्ण गांधी के अनुसार, गुजराती मूल के परिवार में जन्म लेने के बावजूद दिनेश त्रिवेदी ने अपना अधिकांश छात्र जीवन और व्यावसायिक जीवन कोलकाता में बिताया है। यही कारण है कि वे बंगाली भाषा और संस्कृति से गहराई से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि संसद और केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनकी उपस्थिति हमेशा बंगाल की आवाज़ के रूप में महसूस की गई और अब यही अनुभव उन्हें ढाका में भी लाभ पहुंचाएगा।

बंगाली भाषा और संस्कृति की समझ बनेगी ताकत

गोपाल कृष्ण गांधी ने अपने लेख में उल्लेख किया कि बांग्लादेश में भारत के अधिकांश उच्चायुक्त किसी न किसी रूप में बंगाली भाषा और संस्कृति से जुड़े रहे हैं। दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश जैसे देश में जहां भाषा और सांस्कृतिक पहचान का विशेष महत्व है, वहां ऐसे राजनयिक की नियुक्ति दोनों देशों के बीच संवाद को और अधिक सहज और प्रभावी बना सकती है।

ढाका पहुंचकर दिया था एकता का संदेश

ढाका पहुंचने के बाद दिनेश त्रिवेदी ने कहा था कि भारत के 1.4 अरब और बांग्लादेश के 20 करोड़ लोगों को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा था कि दोनों देश “एक ही आकाश, एक ही हवा और एक ही दर्द” साझा करते हैं तथा क्षेत्रीय विकास और समृद्धि के लिए साथ मिलकर काम करना आवश्यक है।

उनके इस बयान को कई लोगों ने भारत और बांग्लादेश के साझा इतिहास, संस्कृति और मानवीय संबंधों के संदर्भ में देखा। हालांकि कुछ राजनीतिक समूहों ने इस पर आपत्ति भी जताई थी।

बयान को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया

गोपाल कृष्ण गांधी ने स्पष्ट किया कि दिनेश त्रिवेदी के बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि यह मान लेना कि उनके वक्तव्य में बांग्लादेश को भारत में मिलाने जैसी कोई सोच छिपी हुई थी, पूरी तरह निराधार और गलत है।

उन्होंने कहा कि दिनेश त्रिवेदी केवल उन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की बात कर रहे थे जो भारत और बांग्लादेश को दशकों से जोड़ते रहे हैं। दोनों देशों की अपनी-अपनी संप्रभु पहचान है, लेकिन इसके बावजूद सहयोग और मैत्री के अनेक क्षेत्र मौजूद हैं।

रिश्तों को नई मजबूती देने की चुनौती

विश्लेषकों का मानना है कि दिनेश त्रिवेदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत करना होगा। व्यापार, सीमा प्रबंधन, जल संसाधन, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गोपाल कृष्ण गांधी ने उम्मीद जताई कि नए उच्चायुक्त पुराने संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ नई साझेदारियों को भी आगे बढ़ाएंगे और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार के अविश्वास को कम करने में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।

“भारत-बांग्लादेश का खून एक है”

अपने लेख में गोपाल कृष्ण गांधी ने 1972 की एक ऐतिहासिक घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद जब शेख मुजीबुर रहमान दिल्ली आए थे, तब एक व्यक्ति ने प्लेकार्ड दिखाया था जिस पर लिखा था— “भारत-बांग्लादेश का खून एक है, गंगा-पद्मा की बाढ़ एक है।”

उन्होंने कहा कि यह वाक्य दोनों देशों के ऐतिहासिक और भावनात्मक रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। उम्मीद की जा रही है कि दिनेश त्रिवेदी के नेतृत्व में भारत और बांग्लादेश के संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और दोनों देश साझा हितों के मुद्दों पर और अधिक सहयोग के साथ आगे बढ़ेंगे।


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