द देवरिया न्यूज़,नई दिल्ली : ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के 14-15 मई को भारत दौरे पर आने की संभावना है। वह नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले सकते हैं। इस बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, क्षेत्रीय सुरक्षा और मौजूदा संकट के समाधान पर प्रमुख रूप से चर्चा होने की उम्मीद है।
अराघची का यह संभावित दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। ऐसे में ब्रिक्स मंच पर होने वाली बातचीत को कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। भारत इस बैठक की मेजबानी कर रहा है और सदस्य देशों के विदेश मंत्री इसमें भाग लेंगे।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में गाजा संकट, ईरान-इजरायल तनाव, क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। भारत और ईरान के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को लेकर भी द्विपक्षीय बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।
ईरान का ब्रिक्स समूह में शामिल होना दोनों देशों के संबंधों को नया आयाम देने वाला माना जा रहा है। ईरान वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स समूह का सदस्य बना था। इसके बाद यह पहली बार होगा जब ईरानी विदेश मंत्री ब्रिक्स के विस्तारित ढांचे के तहत भारत में किसी बड़े बहुपक्षीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ईरान दोनों ही बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था, क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं और ऊर्जा सहयोग को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं। चाबहार बंदरगाह परियोजना, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और व्यापारिक सहयोग जैसे मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
इस बीच, ईरानी सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी भी इस सप्ताह भारत आ सकते हैं। उनके भी ब्रिक्स से जुड़े कार्यक्रमों और कूटनीतिक बैठकों में शामिल होने की संभावना है।
भारत की ओर से अभी तक ईरानी विदेश मंत्री के दौरे को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इस संभावित यात्रा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह दौरा भारत और ईरान के बीच राजनीतिक संवाद को और मजबूत करेगा।
ब्रिक्स समूह, जिसमें अब 10 सदस्य देश शामिल हैं, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले अंतरराष्ट्रीय ढांचे के विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया संकट पर इस मंच की चर्चा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान से देखा जा रहा है।
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