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किम जोंग उन का विवादित बयान, ‘कैद से बेहतर मौत’—उत्तर कोरिया की सख्त सैन्य नीति पर उठे सवाल

Published on: April 30, 2026
Kim Jong Un's controversial statement
द  देवरिया न्यूज़,प्योंगयांग : उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बहस छेड़ दी है। उन्होंने कथित तौर पर उन सैनिकों की सराहना की है, जिन्होंने दुश्मन के हाथों पकड़े जाने से बचने के लिए अपनी जान दे दी। इस बयान को उत्तर कोरिया की सख्त और विवादित सैन्य नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) की रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन प्योंगयांग में एक स्मारक उद्घाटन समारोह के दौरान बोल रहे थे। यह स्मारक उन उत्तरी कोरियाई नागरिकों और सैनिकों की याद में बनाया गया है, जिनकी हालिया संघर्षों में मौत हुई। अपने संबोधन में किम ने उन सैनिकों को “नायक” बताया, जिन्होंने कथित तौर पर यूक्रेन संघर्ष के दौरान पकड़े जाने की बजाय आत्मबलिदान का रास्ता चुना।

हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि उत्तर कोरिया द्वारा अपने सैनिकों को रूस-यूक्रेन युद्ध में भेजे जाने या ऐसी किसी आधिकारिक नीति की स्वतंत्र पुष्टि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट रूप से नहीं हुई है। दक्षिण कोरिया, यूक्रेन और पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों ने जरूर दावा किया है कि उत्तर कोरिया ने रूस की मदद के लिए सैनिक और सैन्य सामग्री भेजी है, लेकिन रूस और उत्तर कोरिया दोनों ने इस पर खुलकर पुष्टि नहीं की है।

किम जोंग उन ने अपने भाषण में “सम्मान” और “आत्मसम्मान” को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि सैनिकों ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने देश और सम्मान की रक्षा के लिए जान दी। उन्होंने इसे “वीरता” करार दिया। उनके इस बयान के बाद मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने चिंता जताई है कि यदि ऐसे निर्देश वास्तव में दिए जाते हैं, तो यह सैनिकों के अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के खिलाफ हो सकता है।

रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी युद्ध अब एक लंबा और जटिल संघर्ष बन चुका है। इस दौरान कई देशों की अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष भूमिका को लेकर दावे किए जाते रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया ने रूस को हथियार और अन्य सैन्य सहायता उपलब्ध कराई है।

दक्षिण कोरियाई और पश्चिमी एजेंसियों का अनुमान है कि हजारों उत्तरी कोरियाई सैनिकों को इस संघर्ष में भेजा गया हो सकता है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। साथ ही, युद्ध में उनके नुकसान को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

कुल मिलाकर, किम जोंग उन का यह बयान न केवल सैन्य नीति बल्कि मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर वैश्विक प्रतिक्रिया और स्पष्टता सामने आना महत्वपूर्ण होगा।



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