ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री ने प्रणय वर्मा को उनका कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। वहीं, भारतीय उच्चायुक्त ने बांग्लादेश सरकार की ओर से मिले सहयोग और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब डॉ. खलीलुर्रहमान इस सप्ताह चीन की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इस दौरे की पुष्टि करते हुए कहा है कि बांग्लादेश उसका पुराना मित्र और करीबी साझेदार रहा है। बीजिंग ने उम्मीद जताई है कि इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
चीन ने अपने बयान में कहा कि पिछले पांच दशकों में दोनों देशों के संबंध शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और आपसी सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित रहे हैं। चीन, बांग्लादेश के साथ आर्थिक सहयोग, विकास परियोजनाओं और क्षेत्रीय साझेदारी को और आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
इस बीच, बांग्लादेश में तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने कार्यकाल के दौरान इस परियोजना में भारत की भागीदारी को प्राथमिकता देने की बात कही थी, जबकि मौजूदा अंतरिम सरकार ने इसमें चीनी कंपनियों को शामिल करने में रुचि दिखाई है।
तीस्ता परियोजना का प्रस्तावित क्षेत्र भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के करीब होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस परियोजना में चीन की संभावित भागीदारी को लेकर भारत की चिंताएं भी सामने आती रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश इस समय संतुलित विदेश नीति अपनाते हुए भारत और चीन दोनों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ढाका इन दोनों देशों के बीच अपने हितों को कैसे संतुलित करता है।